पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी : प्रदेश में इलाज की सुविधा और ही सरकार को यह पता कि मरीज कितने

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी : प्रदेश में इलाज की सुविधा और ही सरकार को यह पता कि मरीज कितने

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जालोर में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत को चिकित्सकों ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का अंदेशा जताया

भ्ास्करन्यूज | पाली

मस्कुलरडिस्ट्रॉफी के प्रदेश में कितने मरीज हैं, इसकी जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्रालय तक को नहीं है। यही स्थिति प्रदेश की भी है। केंद्र सरकार ने भारतीय विकलांगता अधिनियम वर्ष 2012 के तहत इस बीमारी के मरीजों को विकलांगता की श्रेणी में तो लेने का प्रयास किया लेकिन यह बिल भी पास नहीं हो पाया।

न्यूरोलोजी के चिकित्सकों के अनुसार यह इतनी रेयर बीमारी नहीं है, बावजूद अभी जेनेटिक होने के कारण इसका उपचार संभव नहीं है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एसोसिएशन ऑफ यूएसए के अनुसार प्रति दो हजार में से एक व्यक्ति को यह बीमारी होती है। बावजूद इसके इस मर्ज से पीड़ितों को तो सरकारी स्तर पर कोई राहत मिल रही है और ही चिकित्सा जगत से। साथ ही इस बीमारी के उपचार की भी कोई व्यवस्था नहीं होने से गरीब मध्यम तबके के मरीज तो इसका उपचार भी नहीं करा पाते। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो इस बीमारी को स्टेम सेल थैरेपी से महज नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह थैरेपी देश के दो-तीन बड़े निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। ऐसे में मध्यम तबके के मरीजों के लिए यह थैरेपी लेना उनकी पहुंच से दूर है।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज की यूं तो देशभर में कोई खास व्यवस्था नहीं है, लेकिन मांसपेशियों को सिकुड़ने से रोकने के लिए कुछ दवाइयां दी जाती हैं। इसके अलावा विकलांग उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है, जबकि कुछ मरीजों के लिए शल्य चिकित्सा की जा सकती है। हालांकि स्टेम सेल थैरेपी से इस बीमारी को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इस थैरेपी की सुविधा देश के मुंबई, पूना, बेंगलूर तथा चेन्नई में इक्के-दुक्के बड़े निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। साथ ही यह थैरेपी काफी महंगी होती है, जो आमजन की पहुंच से काफी दूर होती है। वैसे आयुर्वेद में पंचकर्म के तहत इस बीमारी के रोगी को थोड़ी राहत मिल सकती है।

{मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एसोसिएशन यूएसए के अनुसार प्रति 2000 व्यक्तियों में से एक को यह बीमारी

{वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने भारतीय विकलांगता अधिनियम बिल तैयार किया था लेकिन वह पास नहीं हो सका, इसमें मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित मरीजों के लिए भी प्रावधान थे

{जेनेटिक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का कोई उपचार नहीं, अभी तक की रिसर्च में सिर्फ थैरेपी से कुछ हद तक रोके जाने के प्रयास होते हैं, वह भी मुंबई और बैंगलूर जैसे बड़े सेंटरों पर

{बच्चों को वंशानुगत होने वाली मस्कुलर डिस्ट्रॉफी में 20 साल की उम्र तक आते-आते मरीज की मौत हो जाती है।

^यह आनुवांशिक रोग है। इसका कोई इलाज संभव नहीं है। हां, मरीज को नियमित व्यायाम करने से फायदा मिल सकता है। व्यायाम करने से मांस पेशियां सिकुड़ेंगी नहीं जिससे यह बीमारी आगे नहीं बढ़ेगी। -डॉ. चंद्रमोहन शर्मा, न्यूरोलॉजिस्ट,एसएमएस, जयपुर

^हालांकि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन स्टेम सेल थैरेपी से इस बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। स्टेम सेल थैरेपी की सुविधा देश के कुछ प्रमुख शहरों में ही उपलब्ध है। वैसे मुंबई के सायन सरकारी अस्पताल में भी यह थैरेपी दी जाती है। -डाॅ. नंदिनी गोकुलचंद्रन, विशेषज्ञ स्टेम सेल थैरेपी, मुंबई

{ प्रदेश के ख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक पनगड़िया के अनुसार मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कई प्रकार होते हैं। प्राय: ये जेनेटिक है और मां के जीन से ज्यादातर लड़कों में ही आती है। मां को यह बीमारी नहीं होती। लेकिन पीड़ित बच्चे के परिवार में उसके मामा को हो सकती है। बचपन से होने वाली इस बीमारी में प्राय: 20 वर्ष तक आयु तक मरीज की मौत हो जाती है।

{ दूसरी तरह की डिस्ट्रॉफी प्राय: 20 वर्ष की उम्र से शुरू होती है। यह जेनेटिक भी हो सकती है और बाई डिफाल्ट भी। इसमें धीरे-धीरे असर दिखता है। और मरीज 50-55 साल या ज्यादा उम्र तक भी सरवाइव कर सकता है।

{ कई बार ऐसा भी देखा गया है कि पहली बार परिवार में जिस व्यक्ति को यह बीमारी होती है उसमें धीरे-धीरे इसके लक्षण दिखते हैं। उसके पांव-हाथ, सीने में असर दिखता है।

यह है बीमारी के लक्षण

प्रदेशके सबसे बड़े जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक जैन के अनुसार इस बीमारी में रोगी की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ने लगती है जिससे रोगी को चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती है। रोगी तेज गति से भी नहीं चल सकता है। कुछ समय बाद उसे श्वास लेने में भी परेशानी होती है। इस कारण उसे चढ़ने और उतरने में भी काफी परेशानी होती है। कुछ लोगों में यह बीमारी जन्म से ही होती है, तो कुछ लोग पांच साल की उम्र में इस बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं। जब रोगी बीस साल का होता है तब तक उसे चलने-फिरने में परेशानी महसूस होने लगती है। कई मामलों में इस बीमारी के मरीज लकवाग्रस्त भी हो जाते हैं। इसके अलावा मरीज की अंगुलियों और चेहरे की मांसपेशियों में प्रभाव पड़ने लगता है। साथ ही उसे ऊंचे कदम उठाकर चलने में परेशानी होती है। कई रोगियों में इस बीमारी के कारण गंजापन जाता है।

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

मस्कुलरडिस्ट्रॉफी एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान की शक्ति क्षीण हो जाती है तथा मसल्स कमजोर होने के साथ सिकुड़ने लग जाती हैं। बाद में यह टूटने लगती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह एक तरह का आनुवंशिक रोग है, जिसमें रोगी में लगातार कमजोरी आती है और उसकी मांस पेशियों का विकास रुक जाता है। इसके अलावा कंकालीय पेशियां (स्केलेटल मसल्स) नष्ट होने लगती हैं। इस बीमारी में मांसपेशियों की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। धीरे-धीरे इस बीमारी में मस्तिष्क और स्नायु तंत्र के मध्य सामंजस्य बिगड़ने लगता है तथा प्रोटीन बनने की क्रिया बाधित हो जाती है। इस कारण से मांसपेशियों का विकास रुक जाता है।

बीमारी इतनी गंभीर

जालोर में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत

चितलवानाक्षेत्र के भादरूणा गांव में पिछले कुछ वर्षों में एक ही परिवार के चार लोगों की मृत्यु होने का मामला सामने आया है। चिकित्सकों के अनुसार यह मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के केस हैं। परिवार के गोवाराम ने बताया कि परिवार में लोगों को लगभग 20 साल की उम्र में पहले हाथ-पांव में जकड़न की बीमारी शुरू होती है। फिर बोलने में तकलीफ होती है। अब तक परिवार के भूराराम पुत्र गमनाराम, गवरीदेवी प|ी रतनाराम, वगताराम पुत्र अमराराम और वीरा पुत्र वगतराम की मौत हो चुकी है। वहीं गोवाराम पुत्र रतनाराम, पार्वती पुत्र भूराराम अमीया पुत्री रतनाराम अभी इस बीमारी से पीड़ित हैं।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज घर के कार्यों को सुव्यवस्थित करने में व्यस्तता बनी रहेगी। परिवार जनों के साथ आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने संबंधी योजनाएं भी बनेंगे। कोई पुश्तैनी जमीन-जायदाद संबंधी कार्य आपसी सहमति द्वारा ...

    और पढ़ें