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गाजे-बाजे के साथ निकाली कलशयात्रा

7 वर्ष पहले
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पाली। गीता भवन में शुरु होने वाली रामकथा को लेकर गुरुवार को गाजे बाजे के साथ कलशयात्रा निकाली गई। कलशयात्रा गीता भवन से रवाना होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुन: गीता भवन पहुंची। सत्संग भवन के अध्यक्ष स्वामी प्रेमानंद ने बताया कि कलशयात्रा में कथा वाचक प्रीतमदास महाराज, अमृतराम महाराज केवलानंद महाराज समेत कई साधु-संतों का सानिध्य रहा। साथ ही कलशयात्रा का जगह-जगह समाजसेवी संगठनों की ओर से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
कलशयात्रा में बालिकाएं महिलाएं सिर पर कलश धारण किए चल रही थीं। इस दाैरान मंगल गीतों भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस मौके पर शंकर भासा, रणजीतसिंह राजपुरोहित, श्रवणसिंह चौहान, साध्वी दुर्गा बहन समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।

कथा का हुआ पूजन : कलशयात्रा के गीता भवन पहुंचने के बाद मुख्य यजमान शीतलदास पमनानी दंपती की ओर से व्यास पूजन किया गया। इस दौरान अंबालाल सोलंकी, हरीश हेड़ा पुखराज शर्मा समेत गीता भवन के ट्रस्टियों की ओर से कथावाचक प्रीतमदास काे माला पहनाकर स्वागत किया गया।

मनुष्यविलासिता में डूबता जा रहा है : संत

रामकथाका वाचन करते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत ने कहा कि मनुष्य इंद्रियों का गुलाम और विलासिता में डूबता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कथा की सफलता के लिए श्रोता में श्रद्धा विश्वास होना जरूरी है। इंसान वही है, जो दूसरों के दुख को देखकर भाविक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रामकथा में क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य सभी वर्ण भागीदार हैं। भारतीय संस्कृति में माताओं काे जो सम्मान है, वह विश्व की किसी संस्कृति में नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रामायण का एक-एक शब्द महापाप का नाश करता है। मनुष्यों को बुद्धि का अहंकार छोड़कर सत्संग में जाना चाहिए।
(पाली. गीता मंदिर से निकाली गई कलशयात्रा।)