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\"संतों के बताए मार्ग पर चलें\'

7 वर्ष पहले
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पाली. जैनसंत रूपमुनि ने कहा कि संतों के बताए मार्ग पर चलने से जीवन सफल हो जाता है। वे गुरुवार को नाडोल में मुक्ता मिश्री रूप सुकन दरबार में चातुर्मास के अंतिम दिन विदाई समारोह में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि नाडोल मेरी जन्मभूमि है। दीक्षा के 72 वर्ष के बाद मेरा यहां प्रथम चातुर्मास हुआ। उन्होंने कहा कि नाडोल के गुरुभक्तों ने गुरु भक्ति का परिचय देकर अपने गुरु के प्रति समर्पण को सिद्ध कर दिया है। इस अवसर पर उप प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज, तपस्वी र| अमृत मुनि, डा.अमरेश मुनि, डा.दीपेश मुनि, अखिलेश मुनि ने भी प्रवचन दिए। उदयपुर संघ ने 2015 के चातुर्मास के लिए जैन संत रूपमुनि से विनती की। समिति के अध्यक्ष जैन ने बताया कि शुक्रवार सवेरे चातुर्मास के बाद जैन संत रूपमुनि एवं सभी संतवृंद प्रथम विहार रूपमुनि धर्मशाला से आशापुरा माताजी पाट स्थान मंदिर के लिए होगा। समारोह में पुलिस उप निदेशक हेमंत पुरोहित, एसपी अनिल टांक एवं बाहर से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

इस मौके पर चातुर्मास समिति नाडोल अध्यक्ष कांतिलाल जैन, महामंत्री हितेश, जयचंद कटारिया, नेमीचंद चौपड़ा, देवीचंद बोहरा,मत्री जगदीशसिंह राजपुरोहित, जवरीलाल कटारिया, प्रकाशचंद, मेघाराम मेघवाल आदि मौजूद थे। मंच संचालन महावीरचंद बोरूंदिया ने किया।