पाली। गर्ल्स कॉलेज परिसर में मंगलवार को ज्ञान और इतिहास का संसार सजा था। देश में साहित्य जगत में नामचीन लेखकों के हाथों से उकेरा गया देश का इतिहास, सामाजिक विसंगतियों का आभास कराने वाली व्यवस्थाएं, पुरातन संस्कृति, विद्रुपता से लिपटा देश का एक खास वर्ग के साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द का समावेश भी यहां मौजूद था।
उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद से लेकर महाश्वेता देवी तथा विवादित लेखिका के रूप में सुर्खियां बटोरने वाली तस्लीमा नसरीन के साहित्य वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान अपनी और बरबस खींच रहे थे। मौका था कॉलेज में हर साल लगने वाले पुस्तक मेले का। मेले में लेक्चर्स से लेकर स्टूडेंट ने उत्साह के साथ भाग लिया। साथ ही इन पुस्तकों को लेकर खासी उत्सुकता भी दिखाई।
कॉलेज के सभाकक्ष में लगाए गए दो दिवसीय पुस्तक मेले का शुभारंभ सुबह 11 बजे बांगड़ कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुशीला राठी ने किया। इस अवसर पर गर्ल्स कॉलेज प्राचार्य पारसमल संचेती, उपप्राचार्य विजयसिंह मीणा, हरनाथसिंह व्याख्याता डायालाल सहित बांगड़ कॉलेज, विद्यावाड़ी, जालोर, जेतपुर गर्ल्स कॉलेज प्रशासन के प्रमुख प्रतिनिधियों समेेत कई व्याख्यातागण मौजूद थे।
पुस्तक मेला प्रभारी महेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि इस पुस्तक मेले में इस बार कई ज्ञानप्रद पुस्तकों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। साथ ही राजस्थान की पुरातन संस्कृति, जोधपुर पाली का इतिहास, स्वास्थ्य दर्शन, खाना खजाना, देश पर्यटन, संगीत, चिकित्सा, कंप्यूटर प्रबंधन पर कई नामचीन लेखकों की तरफ से लिखी गई ज्ञानपरक पुस्तकों को भी मेले में सजाया गया।
मधुशाला गुनगुनाई तो मुंशी के गोदान को पढ़ा
कोई हरवंशराय बच्चन की कविताओं को पढ़ रहा था, कोई मुंशी प्रेमचंद के प्रेमाश्रम को। वहीं कॉलेज स्टूडेंट अपने भविष्य के लिए कैरियर गाइडेंस देख रहे थे, तो कॉलेज व्याख्याता अपने स्टूडेंट के लिए नई पुस्तकों का चयन कर रहे थे। पुस्तक मेले में राज्य राष्ट्रीय स्तर के 25 से ज्यादा प्रकाशन हाउस सैकड़ों विख्यात लेखकों की कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई।
पुस्तक मेले को देखने के लिए कॉलेज स्कूल स्टूडेंट के साथ-साथ शहर के लोगों ने भी अपना उत्साह दिखाया।
इन लेखकों के साहित्य रहे आकर्षण का केंद्र
इस प्रदर्शनी में विख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद, मनोहर श्याम जोशी, नागार्जुन, धर्मवीर भारती, राजेंद्र यादव, रामदरश मिश्र, शिवप्रसादसिंह, उदय प्रकाश, तसलीमा नसरीन, महाश्वेता देवी, नटवरसिंह, निर्मल शर्मा, हरिवंशराय बच्चन, रवींद्रनाथ टैगोर महादेवी वर्मा सहित कई लेखकों की कृतियों को प्रदर्शित किया गया। इन लेखकों के साहित्य प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा।