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काटने थे 13 फैक्ट्रियों के कनेक्शन, 4 के ही काटे

7 वर्ष पहले
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पाली। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेश कितना प्रभावी होता है, इसका ताजा उदाहरण हाल ही में सीधा ही नालों में रंगीन पानी छोड़ने का संदेह में शहर की 13 फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन तत्काल प्रभाव से बंद करने का मामला है। बोर्ड ने इन फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन रोकने के साथ ही बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के लिए डिस्कॉम जलदाय विभाग को पत्र लिखा था, मगर अभी तक 4 फैक्ट्रियों के ही बिजली के कनेक्शन काटे गए हैं। अन्य फैक्ट्रियों के आदेश के मामले में रिव्यू होने की जानकारी मिलने के बाद इस कार्रवाई को रोक दी है, जबकि जलदाय विभाग ने तो अभी तक एक भी इकाई का जल कनेक्शन नहीं काटा है।
4 फैक्ट्रियों के काटे बिजली कनेक्शन, 9 को रिव्यू के नाम पर छोड़ा
राजस्थानप्रदूषण नियंत्रण मंडल जयपुर से आदेश मिलने के बाद स्थानीय क्षेत्रीय अधिकारी आर.बी मौर्य ने भी डिस्कॉम जलदाय विभाग के एसई को पत्र लिखकर उक्त सभी इकाइयों के बिजली पानी के कनेक्शन शीघ्र ही काटने के लिए कहा था। इस पर डिस्कॉम अधिकारियों पत्र मिलने के बाद 4 फैक्ट्रियों के कनेक्शन काट दिए थे, वहीं 9 फैक्ट्रियों के जयपुर में अपील करने के बाद रिव्यू होने के कारण आगामी आदेश तक कार्रवाई रोक दी गई।
हैरत की बात तो यह है कि जलदाय विभाग ने तो अभी तक एक भी फैक्ट्री का कनेक्शन नहीं काटा है। सीईटीपी को भी इन इकाइयों से पानी नहीं लेने के लिए कहा गया था। सीईटीपी चेयरमैन अनिल मेहता का कहना है कि वे फिलहाल 13 फैक्ट्रियों का रंगीन पानी ट्रीट के लिए नहीं ले रहे हैं। इन इकाइयों की ट्रीटमेंट प्लांटों से कनेक्टिविटी भी निरस्त कर दी गई है।
उद्यमियों ने की उच्चाधिकारियाें के समक्ष अपील
फैक्ट्रीसे बिना ट्रीट किए पानी सीधे नाले छोड़ने के मामले में दोषी 13 फैक्ट्रियों के संचालकों में से 9 फैक्ट्री मालिकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जयपुर में अपील दायर की है। इनकी सुनवाई आगामी दो-तीन दिन में होगी।

मंडिया रोड की इकाइयों पर गिरी थी गाज
इनइकाइयों को आउटलेट से पानी छोड़ते हुए ताे नहीं पकड़ा था, अलबत्ता इकाइयों के बाहर नाले में पानी को देखते हुए मंडिया रोड की 13 फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करने की सिफारिश करते हुए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मुख्यालय को पत्र लिखा था। इस पर उनके क्लोजर के आदेश जारी किए गए हैं। बोर्ड ने यह कार्रवाई राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण एक्ट 1974 की धारा 33 के तहत करते हुए मंडिया रोड इलाके की इन फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन बंद कराने के साथ ही इनके बिजली पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए थे।

इनका कहना है :''राजस्थानप्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेश की पालना की जा रही है। प्रोडक्शन बंद कराई जाने वाली 13 फैक्ट्रियों का पानी नहीं लिया जा रहा है। सीईटीपी ने इनकी कनेक्टिविटी भी अस्थाई तौर पर निरस्त कर दी है। -अनिल मेहता, अध्यक्ष,सीईटीपी
''राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पत्र के अनुसार संबंधित फैक्ट्रियों में कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है। 4 फैक्ट्रियों के कनेक्शन काटे गए हैं, रिव्यू होने तक शेष फैक्ट्रियों के लिए कार्रवाई रोकी गई है।'' -इम्तियाजबैग, एक्सईएन,डिस्कॉम, पाली
''जलदाय विभाग को आदेश मिले हैं। इस पर कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल, कनेक्शन नहीं काटे गए हैं।'' -केसी सिंघाडिय़ा, एक्सईएन,जलदाय विभाग, पाली

यह था मामला : जानकारी के अनुसार फैक्ट्रियों से निकलने वाला रंगीन पानी बार-बार ओवरफ्लो होकर सड़क पर फैलने तथा बांडी नदी में गिरने को लेकर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी प्रबोधन कमेटी ने आदेश जारी कर सभी औद्योगिक इकाइयों को टैंकरों से ही पानी ट्रीटमेंट प्लांट तक छोड़ने के आदेश दे रखे हैं। इस आदेश के बावजूद कई इकाइयां नालों में ही सीधा पानी छोड़ रही हैं। इसके चलते आए दिन नालों से पानी छलककर बांडी नदी में जा रहा है।
लगातार ऐसी शिकायतों को देखते हुए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अपने जेएसओ (जूनियर वैज्ञानिक अधिकारी) तथा कलेक्टर रोहित कुमार गुप्ता ने एसडीएम विशाल दवे के निर्देशन में मॉनिटरिंग करने के आदेश दिए थे। इन टीमों ने लगातार शहर के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण कर सीधा ही नालों में रंगीन पानी को प्रवाहित करने वाली ऐसी इकाइयों की तस्दीक की थी।
- 9 फैक्ट्रियों के खिलाफ निर्णय पर रिव्यू होने के चक्कर में रोकी कार्रवाई, जलदाय विभाग ने नहीं काटा अभी तक एक भी कनेक्शन ।