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चाय की चुस्कियों के साथ यादों की साइकिलें एक बार फिर दौड़ी पाली की सड़कों पर

7 वर्ष पहले
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पाली. यादों की साइकिलें एक बार फिर पाली की सड़कों पर दौड़ती नजर आई। बीते साल इंग्लैंड से साइकिल सफारी का लूत्फ लेने पाली आया दल मंगलवार को फिर पाली पहुंचा। उसी चाय की दुकान पर चाय की चुस्कियां तो ली ही, बुजूर्ग चाय वाले की उसकी खिंची मुस्कुराती फोटो भी भेंट की। टूटी बिखरी सड़कों को निहारा।
बेलगाम दौड़ते ट्रेक्टर, टैंकर और सड़क पर अठखेलियां करते हाथी के नजारों को अपने कैमरों में कैद किया। सरपट भागती और दौहरे अर्थो में भाेगती यहां की जिंदगी पर ठहाके भी लगाए। बिकने को तैयार खाली मटकियां, पास पड़े वॉटर कंटेनर और कुदरती फल तरबूज को देख कई क्लिक किए। सैलानियों ने बताया कि वे प्रतिवर्ष यहां आते है। उनका उद्देश्य बाल श्रम को लेकर विरोध दर्ज कराना भी है। जोधपुर से वे साइकिलें खरीदते है। उनका काफिला कुंभलगढ़ पहुंचकर संपन्न होता है। यहां वे अपनी साइकिलें ऐसी संस्थानों को दान कर देते है जो बाल श्रम अभियान को लेकर काम करती है।

फिर वहीं बिखरी सड़कें

पाली के लिए दुखदायी रहा कि सभी सैलानी सड़कों को लेकर नकारात्मक सोच अपने साथ ले गए। उनका कहना था कि एक वर्ष में यदि कुछ नहीं बदला तो वह हैं यहां की बिखरी सड़के और सड़क के बीच पड़े गड्ढे। उसके फोटो भी वे अपने साथ ले गए।

अनुशासन का पाठ

काफिलाजिस मार्ग से गुजरा वहां अनुशासन का पाठ पढ़ता चला गया। जोधपुर रोड से नया गांव और वहां से वापस उदयपुर की ओर जाते वक्त वे कतारबद्ध तरीके से चले और और साइड लेकर ही हर मोड पार किया।

बच्चों को दुलार भी

रास्ते में एक बच्ची को लेकर खड़े मोटरसाइकिल चालक को देखा तो एक लेडी सेलानी वहां उतर गई। उसने बच्ची को दुलार दिया और उसके पिता से इशारों में यह जानने की कोशिश की कि वह पढ़ती है या नहीं।

नहीं भूले चाय की चुस्कियां

सैलानियों को आज भी एक वर्ष पूर्व ली चाय की चुस्कियां याद थी। वे नया गांव स्थित उसी होटल पर पहुंचे। चाय बेचने वाले वृद्ध और उसकी बेटी की जो फाेटो उन्होंने गत वर्ष ली, उसे सहेजकर रखा और पाली आकर उसे दी।