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श्रीमद भागवत कथा को लेकर निकाली शोभायात्रा मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुई कथा, उमड़े श्रद्धालु

5 वर्ष पहले
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श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति के तत्वाधान मे गोवत्स राधाकृष्ण महाराज द्वारा शनिवार से आठ दिवसीय कथा का शुभारंभ अग्रसेन वाटिका में किया गया। भागवत कथा के पूर्व सुबह 9 बजे कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें 108 महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर कलश यात्रा निकाली गई। इससे पूर्व कलश पूजन का कार्यक्रम किया गया, जिसमें कई श्रद्धालु मौजूद थे। कलश यात्रा के दौरान कलश धारी महिलाओं के साथ यजमान परिवार द्वारा भागवत कथा सिर पर धारण कर राधाकृष्ण महाराज के साथ अग्रसेन वाटिका से कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा वाटिका से प्रारंभ होकर पानी दरवाजा, श्री नाथ जी की पोल, पल्ली वालों का बास, बादशाह का झंडा, सर्राफा बाजार, फतेहपुरिया बाजार, वैंकटेश मंदिर होते हुए पुन: अग्रसेन वाटिका आकर संपन्न हुई। कलश यात्रा के अग्रसेन वाटिका पहुंचने पर कथा वाचक राधाकृष्ण महाराज के सानिध्य में कथा की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद कथा का वाचन किया। कार्यक्रम के दौरान ताड़केश्वर रामेश्वर चेरिटेबल ट्रस्ट के आशाराम गोयल, रामेश्वर प्रसाद गोयल, मदनलाल गर्ग, नंदलाल गर्ग, लघु उद्योग भारती के प्रकाशचंद्र गुप्ता, कैलाशचंद्र जोशी, बजरंगलाल हरकुट, कमल गोयल, कृष्णकुमार जिंदल सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।

कथा वाचक गोवत्स राधाकृष्ण सानिध्य में हुए प्रवचन के दौरान 3 हजार श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रवचन में कथा के सुनने के लाभ पडऩे वाले प्रभाव की जानकारी दी।

मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुई भागवत कथा

कार्यक्रमके तहत प्रथम सत्र में महाराज द्वारा मंत्रोच्चार के साथ भागवत की पूजा कर दोपहर 3 बजे कथा का शुभारंभ किया गया। भागवत कथा में गोवत्स राधाकृष्ण ने गौ माता को वंदन करते हुए कहा कि ऋतुओं में सर्वश्रेष्ठ ऋतु बसंत ऋतु होती है। बसंत ऋतु में भागवत का होना हम सभी के लिए सौभाग्य है। भागवत कथा मानव निर्माण की पद्धति है, जिसके मन का प्रभाव ज्यादा है उसी को मानव कहते है। मन में सुंदरता है तो तन की कुरूपता स्वयं ही छिप जाती है। मन से कथा सुनने पर नारायण स्वयं आकर चित्त में विराजमान हो जाते है। धर्म विज्ञान का गहरा संबंध है। वर्तमान परिस्थितियों से मुकाबला करना है तो मातृ भागवत ज्ञान ही इसका एक उपाय है। जैसे जैसे कथा का वेग चलेगा हमारा मन साफ एवं स्वच्छ होगा। साथ ही बताया कि कथा सुनने से मन का विकार, मन के दोष दूर हो जाता है। साथ ही पवित्र जीवन जीने का वातावरण भी तैयार होता है। जीवन में आलस्य का प्रवेश होने दें। समय पर उठकर स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों से बुजुर्गों से ही घर की शोभा बनती है।

पाली. कलश यात्रा के दौरान झांकी जोगचाप का प्रदर्शन किया गया। झांकी में गिरिराज पर्वत की झांकी को देखने के लिए लोग उमड़ते नजर आए। साथ ही कलश यात्रा के दौरान मराठी नृत्य जाेगचाप का भी आयोजन किया गया। जाेगचाप में महिलाओं द्वारा अष्ट ताल चतुर ताल पर नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसको देखने के लिए लोगों का उत्साह साफ नजर रहा था।

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