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मोयला कीट के प्रकोप से दुपहिया वाहन चालक परेशान

5 वर्ष पहले
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हवामें विचरण कर रहे मोयला कीट ने इन दिनों केवल वाहनों के चक्कों को धीमा कर दिया है, बल्कि फसलों को भी नष्ट कर रहे है। मोयला कीट के आंखों में पड़ने के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। चिकित्सकों की माने तो आंखों में मोयला कीट के पड़ जाने से आंख की पुतली में इंफेक्शन हो सकता है। यदि उसको निकालने का सही तरीका नहीं अपनाया जाए तो संबंधित व्यक्ति को मोतियाबिंद तथा काला पानी सहित आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियां भी हो सकती है तथा आंखों में मवाद भी पड़ सकती है। बिना चिकित्सकीय राय के दुकान से खरीदी गई आई ड्रॉप इसमें और सहायक बन सकती है। किसानों को भी मोयला रोग से फसलों को बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों की राय लेकर उचित दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए।

पाली. शहर के पास स्थित एक खेत में फसलों की कटाई करते किसान।

ऐसे बचाएं फसलों को

कृषिअधिकारियों का कहना है कि फसलों को मोयला कीट से बचाने के लिए फसलों पर मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत या कार्बोनिल 5 प्रतिशत या मेलार्थियान 5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा डायमेथियोट 30 ई.सी. 875 मिली लीटर या क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. 600 मि.ली. दवा प्रति हेक्टेयर पानी का धोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।

ऐसे निकालें आंखों से कीट

नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. जीके गोयल बताते हैं कि आंखों में पड़े मोयला कीट को हाथ या रूमाल से निकालने की कोशिश इंफेक्शन को बुलावा दे सकती है। मोयला कीट को बाहर निकालने के लिए गर्म किए हुए पानी को ठंडा करने के बाद उस पानी से आंख को अच्छी तरह से धोना चाहिए। 80 प्रतिशत मामलों में यह कीट निकल जाते है। डॉ. गोयल ने बताया कि इसके बावजूद यदि कीट नहीं निकले और जलन हो रही हो तो बाजार से सीधे आईड्रॉप लेकर आंख में डालने की बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सफर के दौरान चश्मा लगाना ही इसका उपाय है।

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