पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सांसद ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर स्थापना की उठाई मांग

सांसद ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर स्थापना की उठाई मांग

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बिजलीकी समस्या से जूझ रहे राज्य के ग्रामीण और किसानों के लिए गुरुवार को संसद के शून्यकाल में पाली सांसद पीपी चौधरी ने राज्य में सौर ऊर्जा के ट्रांसमिशन के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की स्थापना करने तथा 100 से कम आबादी वाले गांवों और ढाणियों को ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में शामिल करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में कहा पाली जिले में लगलग 70 प्रतिशत लोग किसान है। पूरा राजस्थान बिजली की कमी से जूझता है, जिसकी मार सबसे अधिक किसानों पर पड़ती है। ट्यूबवैल बिजली के कारण नहीं चल पाने से सिंचाई नहीं हो पाती है।

खेती प्रभावित होने का यह एक महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति राज्य का विषय है, लेकिन राज्य को मिलने वाली बिजली में केंद्र का हस्तक्षेप होना भी अनिवार्य हो गया है। विभिन्न परियोजनाओं से राज्य को निर्धारित जल और बिजली दोनों नहीं मिल पा रही है। राजस्थान राज्य का क्षेत्रफल अधिक है, जनसंख्या की बसावट गांवों की अपेक्षा पूरे ढाणियों में ज्यादा है। विषय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर राजस्थान को विशेष राज्य बनाने की मांग भी उठती रही है। सांसद चौधरी ने बताया कि प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल ही में ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर राज्य की विद्युत कंपनियों की माली हालत के बारे में बताया है। इसके साथ सौर उर्जा के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाने तथा 100 की अबादी वाले गावों ढाणियों में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत बिजली सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। राजस्थान की विद्युत कंपनियों पर कर्ज पिछले 5 साल में 15 हजार करोड़ से बढ़कर 77 हजार करोड़ हो गया है। उन्होंने सदन के माध्यम से ऊर्जा मंत्री से भी अनुरोध करते हुए कहा कि सौर उर्जा के ट्रांसमिशन के लिए केंद्र सरकार पावर ग्रिड कार्पोरेशन के माध्यम से राजस्थान में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की स्थापना की जाए।



साथ ही राज्य के 100 से कम आबादी वाले गांवों और ढाणियों को ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में शामिल किया जाए।



ऐसा करने से केवल किसानों को पूरी बिजली मिलेगी, बल्कि कई गांव और ढाणियों भी बिजली से अछूते नहीं रहेंगे।