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एनजीटी में सीईटीपी ने कमियां दुरुस्त करने का टाइम मांगा , अगली पेशी 11 मार्च को
शहरके प्रदूषण मामले को लेकर दिल्ली में शुक्रवार को एनजीटी में हुई सुनवाई के दौरान पाली जल प्रदूषण नियंत्रण परिशोधन एवं अनुसंधान फाउंडेशन (सीईटीपी) ने ट्रीटमेंट प्लांटों के अपग्रेडेशन के लिए बनाई गई डीपीआर में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से निकाली गई कमियों को सुधारने के लिए वक्त मांगा है। इस पर न्यायाधीश ने अगली सुनवाई 11 मार्च को दिल्ली में ही तय की है।
पाली किसान पर्यावरण संघर्ष समिति की तरफ से प्रदूषण मामले को लेकर दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में की जा रही है। पूर्व में सुनवाई जोधपुर में होती थी, मगर अब दिल्ली में की जा रही है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान किसानों की तरफ से पैरवी करने वाले वकील ने प्रदूषण को लेकर हो रहे नुकसान को लेकर जानकारी दी। वहीं सीईटीपी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि शहर में फैक्ट्रियों के रंगीन पानी को ट्रीट करने के लिए संचालित किए जा रहे प्लांट 2,3 तथा 4 के अपग्रेडेशन के लिए सीईटीपी ने अपनी तरफ से डीपीआर तैयार कर दी थी। इसे मंजूरी के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल में भेजा गया था। मंडल के तकनीकी अधिकारियों ने इसमें कुछ कमियां निकालकर उसे दुरुस्त करने के लिए कहा है। इसमें संशोधन कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कुछ वक्त देने की आवश्यकता है। इस पर एनजीटी ने 11 मार्च को अगली सुनवाई रखी है।
पैसा कौन देगा या दे रहा है, यह देखना हमारा काम नहीं-एनजीटी
सीईटीपीकी तरफ से जेडएलडी तथा ट्रीटमेंट प्लांटों के अपग्रेडेशन के लिए केंद्र से पैसा मांगने की प्रक्रिया के बारे में एनजीटी को जानकारी दी तब जज ने मौखिक रूप से कहा कि पैसा कौन देगा या दे रहा है। इस यह देखना हमारा काम नहीं है। एनजीटी में हुई सुनवाई के दौरान किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पुखराज पटेल महामंत्री महावीरसिंह सुकरलाई मौजूद थे। वहीं सीईटीपी से अध्यक्ष अनिल मेहता श्रवण कोठारी भी दिल्ली पहुंचे थे।
सीईटीपी ने कहा- 100 केएलडी का ईटीपी जेडएलडी साथ-साथ कैसे
सीईटीपीकी तरफ से पैरवी कर रहे वकील ने राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेश 100 केएलडी से अधिक पानी छोड़ने वाली इकाई में इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाने के आदेश पर मंडल के सामने दर्ज कराई गई आपत्ति पर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि जब जेडएलडी के लिए सीईटीपी तैयार है तो ईटीपी लगाने से व्यवस्था कैसे संभव होगी। इसके विरोध में आपत्ति दर्ज कराई है। इसका निस्तारण भी मंडल स्तर से होना शेष है।