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‘संसार के प्रत्येक रंग का अपना महत्व है’

5 वर्ष पहले
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अग्रसेनवाटिका में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को कथा वाचक गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि संसार के प्रत्येक रंग का अपना महत्व है। लाल रंग प्रेम का, सफेद रंग शांति का पीला रंग प्रीती का प्रतीक है। मनुष्य के जीवन में श्वास का जितना महत्व है, उतना ही उसके द्वारा राष्ट्र भक्ति में किए गए कार्य का है। ये श्री मद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से अग्रसेन वाटिका में आयोजित आठ दिवसीय भागवत कथा मे श्रद्धालुओं का संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य धर्म में भागवत भक्ति, राष्ट्र भक्ति, मातृ पितृ भक्ति, गुरू भक्ति, श्रृष्टि भक्ति से पांच प्रकार की भक्तियां बताई गई है। इस भक्तियों को समझते हुए मनुष्य को रक्तदान, जीवों पर दया जीवन जीने में सहायता करना चाहिए। वेद उपनिषद श्रृष्टि भक्ति के अंग है जिनका सारांश भागवत कथा में सम्मिलित है। कथा वाचन करते हुए गोवत्स महाराज ने संतो के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गांव में संतों के आगमन से मनुष्य का सुधार होता है। संतो के आचार विचार को ध्यान में रखने से ही मनुष्य की शक्ति बढ़ती है। आधुनिकीकरण के नाम पर पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहना चाहिए। कथा के दौरान महाराज ने एक से बढ़ कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुतियां दी जिस पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। इस मौके पर राष्ट्र स्वयं सेवक संघ के प्रचारक नंदलाल जोशी, चैनसिंह राजपुरोहित, ताड़केश्वर रामेश्वर चेरिटेबल ट्रस्ट के रामेश्वर प्रसाद गोयल, सोहनलाल तोषनीवाल, अनिल झालान, शंकरलाल जोशी, सतनामदास इसराणी, मदनमोहन गुप्ता, शरद बंसल, प्रवीण सोमानी, शिवप्रकाश अग्रवाल सहित कई श्रोतागण मौजूद थे।

कथा कि दौरान राधाकृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को स्वस्थ रहने के नुस्खे भी बताए। नुस्खे में बताया कि ब्रह्म मुहूर्त के समय वाद, कफ और पित्त सुबह एक समान होते है इसलिए मनुष्य के सुबह घूमने से स्वास्थ्य स्वस्थ रहता है। मनुष्य को नित्य सवेरे जल्दी उठ कर प्राणायाम योगासन करना चाहिए।

कथा को लेकर निकाली प्रभात फेरी

कथाको लेकर श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति द्वारा सुबह 6 बजे प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी गोवत्स राधाकृष्ण महाराज के सानिध्य में अग्रसेन वाटिका से रजत नगर, पंचम नगर दुर्गा नगर में निकाली गई। प्रभात फेरी के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा शहरवासियों को पीले चावल देकर कथा में अधिक से अधिक भाग लेने का निवेदन किया।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु

कथाके दौरान गोवत्स राधाकृष्ण महाराज द्वारा भजनों का गायन किया गया। जिसमें ‘‘भाग्य हमारे संत पधारियां...’’, ‘सभा में सोना रो सूरज उग्यो’’, ‘‘आया रे आया मारे संत पावणा आया’’ , ‘‘हरि नाम से तेरा काम बनेगा’’, ‘अबे कई सुतो, सुबह भजन करनी वेला’’ आदि भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर नृत्य करने पर विवश कर दिया।

पाली. भागवत कथा में भजनों की प्रस्तुतियों पर नृत्य करती महिलाएं। फोटो|भास्कर

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