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पाली में प्रदूषण की हालत देखने पहुंचे एनजीटी के कमिश्नर, प्लांटों से रंगीन पानी के सैंपल लिए

4 वर्ष पहले
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नेशनलग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भोपाल के आदेश पर नियुक्त कमिश्नर नामचीन पर्यावरण विशेषज्ञ ओमशंकर श्रीवास्तव ने शनिवार को पाली पहुंचकर शहर की प्रदूषण समस्या के बारे में बारीकी से जानकारी ली। श्रीवास्तव ने ट्रीटमेंट प्लांटों से पानी के सैंपल लिए। साथ ही बांडी नदी, सभी औद्योगिक क्षेत्र, फैक्ट्रियों में लगे ईटीपी तथा टेबल प्रिंटिंग करने वाली इकाइयों में होने वाले कामकाज को सिलसिलेवार समझा। किसानों ने सीईटीपी पहुंचकर अपनी बात को प्रमुखता से रखा, जिसमें कमिश्नर ने आश्वस्त किया कि वे इस बारे में एनजीटी में रिपोर्ट बनाकर देंगे। श्रीवास्तव ने प्लांटों की ऑनलाइन प्रक्रिया, टैंकरों में लगे जीपीएस सिस्टम, फैक्ट्रियों के सैटेलाइटयुक्त फ्लोमीटर, स्कॉडा सिस्टम का भौतिक सत्यापन भी किया। मंडिया रोड पर पलटे एक टैंकर को स्कॉडा सिस्टम में देखने पर उसकी लोकेशन दुरुस्त पाई गई।

सेसकर मुद्दे को लेकर चल रहे विवाद के बाद एनजीटी की भोपाल यूनिट ने शहर में प्रदूषण की हालत देखने तथा ट्रीटमेंट प्लांटों की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी लेने के लिए कमिश्नर नियुक्त किया है। शनिवार सुबह कमिश्नर के रूप में नियुक्त श्रीवास्तव सीधे ही ट्रीटमेंट प्लांट-6 में पहुंचे। यहां पर पानी को ट्रीट करने में उपयोग किए जा रहे केमिकल्स डोजिंग हाउस के बारे में जानकारी ली। कुछ स्थानों के फोटोग्राफ्स भी लिए। इसके बाद मंडिया रोड सीईटीपी कार्यालय पहुंचकर ऑनलाइन सिस्टम की पूरी प्रक्रिया को समझने के साथ कुछ फैक्ट्रियों से आने वाले पानी, टैंकरों के जीपीएस सिस्टम को भी परखा। प्लांटों में आउटलेट तथा इनलेट पानी के सैंपल लिए। इनकी जांच भोपाल स्थित प्रयोगशाला में कराई जाएगी। यहां पहुंचे किसानों को कमिश्नर ने काफी गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे सच्चाई एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट बनाकर रखेंगे। किसानों की तरफ से पर्यावरण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पुखराज पटेल, उपाध्यक्ष गंगादान चारण महावीरसिंह सुकरलाई समेत कई प्रतिनिधि मौजूद थे। यहां से किसान कलेक्टर से भी मिलने पहुंचे। शाम को कमिश्नर ने औद्योगिक क्षेत्र में 3 फैक्ट्रियों का भी निरीक्षण किया।

उद्यमियों ने पाइपलाइन के लिए मांगे 15 दिन, कहा- हर हाल में पूरा कर देंगे

कोर्टकमिश्नर श्रीवास्तव ने सीईटीपी ट्रस्ट मंडल तथा उद्यमी संगठनों की बैठक में मंडिया रोड तथा औद्योगिक क्षेत्र एक दो से रंगीन पानी टैंकरों से आने को लेकर कई सवाल-जवाब किए। उनका कहना था कि ऐसा कब तक चलेगा। इस पर उद्यमियों ने कहा कि मंडिया रोड पर पाइपलाइन बिछाने का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। 15 दिन में ही इस इलाके को जोड़ दिया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र एक दो में पाइपलाइन के लिए टैंडर जारी कर दिए हैं। यह कार्य भी 3 महीने में ही पूरा कराया जाएगा। इसके बाद टैंकरों से पानी परिवहन को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। इस दौरान सीईटीपी अध्यक्ष सुरेश गुप्ता, सचिव अशोक लोढ़ा, सह सचिव एसपी चौपड़ा, रवि मेहता, नरेश मेहता, जगदीश छाजेड़, सतीश कुमार मूंदड़ा, लालचंद लसोड़, विमल सालेचा, कोषाध्यक्ष प्रमोद लसोड़ समेत दर्जनों उद्यमी मौजूद थे। वहीं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आरओ राजीव पारीक से भी कमिश्नर ने प्लांटों की सैंपल रिपोर्ट ली।

ऑनलाइन सिस्टम को बताया एक्सीलेंट

रंगीनपानी पर नजर रखने के लिए लगे सैटेलाइटयुक्त फ्लोमीटर, स्कॉडा सिस्टम, टैंकरों में जीपीएस तथा ऑनलाइन हर फैक्ट्री की मॉनिटरिंग को एनजीटी के कमिश्नर ने काफी एक्सीलेंट बताया। इस सिस्टम का उन्होंने जमीनी स्तर पर सत्यापन भी किया।

पाइपलाइन में देरी पर कमिश्नर ने जताई नाराजगी

मंडियारोड तथा औद्योगिक क्षेत्र एक दो की फैक्ट्रियों से ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी लाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का कार्य काफी धीमा होने पर नाराजगी जताई। इस पर सीईटीपी ने दावा किया कि 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य 15 दिन में ही पूरा कर लिया जाएगा।

^एनजीटी के आदेश पर पाली में प्रदूषण की स्थिति को देखने आए हैं। ट्रीटमेंट प्लांटों की प्रक्रिया को समझा है। ऑनलाइन सिस्टम को भी देखा। कुछ फैक्ट्रियों का भी निरीक्षण किया है। किसानों से मिलकर उनकी पीड़ा को भी सुना है। ट्रीटमेंट प्लांटों के सैंपल लिए हैं। वे शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट बनाकर एनजीटी में पेश करेंगे। -ओमशंकरश्रीवास्तव, कमिश्नर, एनजीटी

इधर, किसानों का आरोप- नेहड़ा में जा रहा रंगीन पानी, नहीं रोका तो हम बर्बाद हो जाएंगे

प्रदूषणको लेकर परेशानी झेल रहे किसानों ने मंडिया रोड पर एनजीटी के कमिश्नर ओमशंकर श्रीवास्तव से मिलकर उनको बांडी नदी में सीधे ही जा रहे फैक्ट्रियों के पानी को लेकर कड़ा एतराज जताया। किसानों ने कहा कि यह पानी नेहड़ा बांध में जाने से इस बार सिंचाई के लायक यह पानी नहीं रहेगा। कमिश्नर ने गैर औद्योगिक इलाकों से पानी के बारे में कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने किसानाें का आश्वस्त किया कि वे पूरी रिपोर्ट बनाकर एनजीटी को सौंपेंगे। जेडएलडी के बारे में कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि इसको लेकर वे कुछ नहीं कह सकते।

एनजीटी द्वारा नियुक्त कमिश्नर पर्यावरण विद ओमशंकर श्रीवास्तव ने देखी फैक्ट्रिया भी।

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