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करवा चौथ पर आज रात 8.30 बजे होगा चंद्रोदय

4 वर्ष पहले
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शहरमें रविवार को महिलाओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ करवा चौथ मनाई जाएगी। व्रत रखने वाली महिलाओं को इस बार चंद्र पूजा के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खगोलीय गणना के अनुसार इस बार चंद्रोदय रात करीब 8.30 बजे हो सकता है। पिछले वर्ष रात 8.59 बजे की तुलना में करीब आधा घंटे कम है। इस बार पूर्णिमा के तीन दिन बाद करवा चौथ होने की वजह से चंद्रोदय रात 8.30 हो जाएगा, क्योंकि खगोल विज्ञान में पूर्णिमा के दिन के बाद हर दिन चंद्र उदय 45 मिनट बाद होता है। ऐसे में अगर गुरुवार को चंद्रमा शाम लगभग 6.14 बजे उदय हुआ तो रविवार को 8.30 बजे उदित होगा। पंडित दिनेश दिनकर के अनुसार चंद्रोदय और सूर्योदय में अंतर इसलिए पाया जाता है, क्योंकि स्थानों की देशांतरी स्थिति भोगोलिक दृष्टिकोण से भिन्नता लिए होती है। ऐसे में सभी स्थानों पर एक समय में चंद्र दर्शन संभव नहीं है।

महिलाएं साडियां, मैचिंग चूडिय़ां और अन्य श्रृंगार को लेकर पिछले कई दिनों से बाजार में खरीददारी कर रही है। इस बार सबसे ज्यादा उत्साहित शादी के बाद पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली युवतियों में नजर रहा है। शहर के सर्राफा बाजार, फतेहपुरिया बाजार, घी का झंडा में महिलाएं रंग बिरंगी डिजाइनर साडियां और फैशनेबल चूडिय़ां के साथ साथ लाख से बनी डिजाइनर चूडिय़ां की सर्वाधिक बिक्री हुई।

यहहै करवा चौथ का धार्मिक महत्व : हिंदूशास्त्रों के अनुसार हर माह में एक चौथ आती है। इनमें साल में आने वाली दो चौथ का महत्व ज्यादा माना जाता है। इसमें मलमास में आने वाला तिल चौथ और दूसरा करवा चौथ शामिल है। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की तृतीया को करवा चौथ मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन एक महिला ने चौथा माता की पूजा अर्चना कर अपने मृत पति को जीवित कर लिया था। तभी से चौथ माता की कहानी सुनने की परंपरा शुरू हुई। माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था और द्रौपदी ने भी पांडवों के लिए यह व्रत किया था।







रोज ऐसे आता है अंतर

रविवार : चंद्रमा12 डिग्री बढ़ने पर उदय रात 8.30 बजे

शनिवार: चंद्रमा फिर 12 डिग्री बढ़ने पर उदय 7.45 बजे

शुक्रवार: चंद्रमा 12 डिग्री बढ़ने पर उदय 6.59 बजे

गुरुवार: शरद पूर्णिमा, चंद्रोदय शाम 6.14 बजे

ऐसे की गई गणना

-चंद्रमा पृथ्वी और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इस दौरान दोनों की स्थिति बदलने को डिग्री में गणना की जाती है।

-पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा 13 डिग्री आगे चलता है। लेकिन पृथ्वी भी चलायमान है और वह परिक्रमा के दौरान एक डिग्री बढ़ जाती है।

-इस तरह चंद्रमा की स्थिति 12 डिग्री बढ़ जाती है। पृथ्वी को एक डिग्री कवर करने में 4 डिग्री लगते हैं।

-इस तरह रोज 12 डिग्री कवर करने में 48 मिनट का अंतर आता है और चंद्रमा का उदय पूर्णिमा के बाद हर दिन 45 से 48 मिनट के बीच होता है।

-यही वजह है कि रोज 45 से 48 मिनट देर होते-होते अमावस्या की रात चंद्रमा, सूर्य के साथ रात बीतने पर नजर आता है।

करवा चौथ

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