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30 साल में पहली बार होगी सीईटीपी में खातों की जांच

5 वर्ष पहले
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पालीजल प्रदूषण नियंत्रण परिशोधन एवं अनुसंधान फाउंडेशन (सीईटीपी) को केंद्र राज्य से मिले करोड़ों रुपए के अनुदान, सेसकर लेने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण में विफल रहने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पहली बार जिला प्रशासन ने सीईटीपी में हुए लेन-देन समेत अन्य अनियमितताओं की ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। देवस्थान विभाग के प्रमुख शासन सचिव के आदेश पर कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने नगर सुधार न्यास के सचिव बजरंगसिंह शेखावत की अध्यक्षता में तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की है। यह टीम बुधवार से ही ऑडिट शुरू कर देगी। इस बारे में सीईटीपी के पदाधिकारियों से 5 साल के कागजात मांगे हैं। सीईटीपी के इतिहास में पहली बार सरकारी स्तर पर ऑडिट कराई जा रही है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार देवस्थान विभाग को सीईटीपी में हो रही अनियमितताओं तथा नियम विरुद्ध लेन-देन को लेकर देवस्थान विभाग को गंभीर आरोपों वाली 8 पेज की शिकायत मिली थी। इस पर विभाग के अतिरिक्त मुख्य शासन सचिव अशोक शेखर (तबादले से पूर्व) ने कलेक्टर को सीईटीपी के कार्यकलापों की जांच के आदेश दिए थे। विभाग ने एडवोकेट चंद्रभानु राजपुरोहित की शिकायत पर दिए। इस पर कलेक्टर ने मंगलवार को यूआईटी सचिव बजरंगसिंह शेखावत की अध्यक्षता में ऑडिट टीम गठित की है। टीम में नगरपरिषद के आयुक्त जनार्दन शर्मा रीको के वरिष्ठ अधिकारी भानाराम को भी शामिल किया है।

^देवस्थान विभाग के प्रमुख शासन सचिव की तरफ से जारी किए गए आदेश की पालना में सीईटीपी के कामकाज की ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की गई है। 5 साल में अब तक सीईटीपी की तरफ से कराए गए कार्यों, सरकारी नियमों, वित्तीय लेन-देन तथा उसकी कार्यशैली को लेकर ऑडिट की जाएगी। जांच टीम को 15 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए हैं। -कुमारपाल गौतम, कलेक्टर, पाली

3 अधिकारियों की टीम करेगी सीईटीपी में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की जांच

सीईटीपीकी कार्यप्रणाली वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए देवस्थान विभाग के आदेश पर कलेक्टर ने गठित की 3 अधिकारियों की टीम।

5साल की अवधि में हुए लेन-देन का हिसाब लेंगे अधिकारी

कलेक्टरके आदेश पर गठित की गई तीन अधिकारियों का जांच दल सीईटीपी में 5 साल में किए गए लेन-देन समेत अन्य वित्तीय आंकड़ों की जांच करेंगे।

करोड़ोंके केमिकल्स खरीद उसकी गुणवत्ता भी परखी जाएगी

सीईटीपीने वर्तमान में ट्रीटमेंट प्लांटों का ठेका दे रखा है। फैक्ट्रियों का पानी ट्रीट करने के लिए केमिकल की जिम्मेदारी भी उसी की है। मगर उससे पूर्व खरीदे गए करोड़ों रुपए के बिल एवं बाउचरों की गहनता से पड़ताल की जाएगी। केमिकल्स की गुणवत्ता भी परखी जाएगी।

ठेकाकंपनी के साथ शर्तों से एमओयू के बारे में भी होगी जांच

प्लांटोंका ठेका देने के दौरान सीईटीपी के साथ दो महीने में अगर निर्धारित मानक पर पानी ट्रीट नहीं करने पर राशि काटने की शर्त समेत कई नियम बनाए थे। इस बारे में भी अधिकारी सभी पक्षों से बात कर जांच करेंगे

1 फरवरी को प्रकाशित समाचार

1. 5 साल की अवधि में केंद्र राज्य से कितना बजट मिला, अनुदान राशि का खर्च किस प्रकार आैर कहां पर किया गया। इसका ट्रीटमेंट प्लांटों को कितना फायदा मिला।

2. 5 साल की अवधि में ट्रीटमेंट प्लांटों के संचालन पर खर्च की गई कुल राशि, सेसकर से हुई सीईटीपी को आय, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर कितना खर्च हुआ।

3. सीईटीपी ने 5 साल में केमिकल्स की खरीद कितनी की, किस कंपनी से मंगवाया गया, उसकी गुणवत्ता को लैब में जांचा गया या नहीं

4. ट्रीटमेंट प्लांटों का अपग्रेडेशन इस अवधि में कितनी बार हुआ, अपग्रेडेशन पर कितना खर्च किया गया। उद्यमियों का इसमें कितना हिस्सा रहा और सरकार से राशि कितनी मिली।

5. स्लज निस्तारण को लेकर राज्य सरकार के आदेश पर सीमेंट कंपनियों के साथ हुए एमओयू में अब तक कितनी स्लज भेजी, उसके परिवहन पर कितना खर्च आया।

6. अब तक सीईटीपी की बैठकों, उनके देश भर में नई तकनीक के लिए किए गए दौरों, चाय-पान समेत अन्य सुविधाओं पर कितनी राशि खर्च की गई।

7. रीको क्षेत्र में आने वाले नालों की सफाई, नेहड़ा बांध में रंगीन पानी जाने से रोकने के लिए लगाए गए रोके तथा किसानों को खाद-बीज सप्लाई करने में कितना खर्च हुआ। यह राशि किस मद से आई।

8. नवनिर्मित ट्रीटमेंट प्लांट 6 तथा निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट पर मिले केंद्र राज्य से अनुदान, उद्यमियों की तरफ से खर्च, अब तक के भुगतान के बिल एवं वाउचरों की जांच भी होगी।

9. ठेकेदार को ट्रीटमेंट प्लांटों का ठेका किस अवधि तक दिया गया। उसमें शर्तें क्या रही। निर्धारित मानक पर पानी ट्रीट नहीं होने पर उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई तथा उसका भुगतान कितना रोका गया।

10. सीईटीपी की तरफ से पानी को ट्रीट करने के अलावा कहां पर रुपए खर्च किए। यह राशि किस मद से जुटाई गई। सीईटीपी की कुल संपत्तियों का ब्यौरा।

1. ट्रीटमेंट प्लांटों के संचालन के लिए जारी पर्यावरणीय स्वीकृति में निर्धारित निर्देशों की पालना नहीं हो रही।

2. 15 साल में ट्रीटमेंट प्लांटों की सैंपल रिपोर्ट में पानी निर्धारित मानक पैरामीटर्स पर खरा नहीं उतरा।

3. कोर्ट के आदेश के बाद भी नदी में पानी छोड़ा जा रहा है, इससे किसानों की जमीन कुएं खराब हो चुके।

4. रंगीन पानी बांडी नदी के जरिए आने के कारण रोहट क्षेत्र के लिए बना नेहड़ा बांध अनुपयोगी हो गया।

5. ट्रस्ट में लगातार वित्तीय अनियमितताएं बरती जा रही है। सरकारी स्तर पर ऑडिट नहीं होती, ही आरटीआई में सूचनाएं दी जाती।

6. प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण ट्रस्ट के खिलाफ दर्ज कराए गए 8 परिवादों की जांच तक नहीं हुई।

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