जीवन में नई शुरुआत के लिए खुद से जिद का पर्व है बसंत पंचमी
जैविक क्रियाओं के अनुकूलता का समय है यह पर्व: विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी
जीवविज्ञान के अनुसार समस्त जैविक क्रियाओं के लिए यह पर्व अनुकूलता का संकेत देता है। प्रकृति अपने खिले हुए रूप में होती है। तापक्रम की रेंज न्यूनतम या अधिकतम की बजाय मध्यम होता है। कीट-पतंगों की सक्रियता को प्रोत्साहित करने वाला होने से पुष्पों पर पर-परागण की क्रिया जल्द होती है। सूर्य का प्रकृति से सामंजस्य होने से स्वयं में सृजनात्मक की आहट महसूस होती है। गेंदा, सूर्य मुखी और खेतों तक में पीले पुष्पों की अधिकता का सकारात्मक ऊर्जा पर असर होता है। बसंत पंचमी के रहस्य जानने में वैज्ञानिक अौर जैव क्रियात्मक तथ्य भी सहायक है। यह भीतर से प्रसन्नता महसूस करने का पर्व है।
प्रकृति पूजा का पर्व है बसंत पंचमी- पंडित प्रेम कुमार शर्मा, खगोल ज्योतिष
वैदिककाल में ज्योतिष अध्ययन की शुरुआत ही बसंत पंचमी से होती थी। चूंकि ज्योतिष को वेद का नेत्र अर्थात ज्योति माना गया है। ऐसे में मनुष्य के भीतर की ज्योति जगाने के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण मानते हैं। यह प्रकृति की पूजा का पर्व है, जिससे आंतरिक उल्लास की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में पीले रंग को पवित्रता का सूचक माना है। बसंत पंचमी को प्रकृति का परिवेश अधिकतम पीला रहता है। अत: मार्गदर्शक विद्या के अध्ययन के शुभारंभ का यह विशेष दिन है। वैसे सृष्टि का प्रारंभ भी बसंत को मानते हैं। सृष्टि प्रकृति पूजन और नव सृजन के लिहाज से भी यह दिन विशेष है। चंद्रगुप्त के काल में बसंत उत्सव मनाया जाता था।
जीवन में पवित्रता बरसाने वाले बसंत पंचमी का निर्णयन आधारित ज्योतिष में विशेष स्थान है।
कौमुदी उत्सव भी है आज- डॉ. संतोष परिहार, विभाग अध्यक्ष हिंदी, बांगड़ कॉलेज
बसंतपंचमी को रंग उत्सव की शुरुआत माना गया है। मुगल काल से इसे कौमुदी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। कुमुद यानि खिलते पुष्प के समान मन प्रसन्नता से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करता है। ज्ञान और प्रेम के इस प्रतीक पर्व भटकाव और दुराव से परे प्रेरणा और जोश जगाने का संदेश मिलता है। चारो और खिली हुई पीली सरसों से सरसराती हवा से मन में उमंगों का संचार होता है। यह संयोग है कि सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म दिन भी आज है। इस तरह बसंत रंग और सरस्वती का संगम बना यह दिन मन, वचन कर्म से अपने ज्ञान उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत श्रेष्ठ है।
खुद से जिद कर संकल्प लें - डॉ. कमलेश घग्गर साहित्यकार, व्याख्याता
अपनेआप से जिद करते हुए जिंदगी के तय लक्ष्यों को हासिल करने का बसंत पंचमी बेहतर अवसर है। अध्ययन शीलता के प्रवाह को बढ़ाते हुए स्वार्थ के बजाय सर्वार्थ सिद्धि का जोश भरने वाला दिन है। नया संचार, नया उत्साह और नई चीजों के प्रति भाव को प्रफुल्लित प्रकृति की भी प्रेरणा दिखाई देती है। उन्होंने साहित्यिक अंदाज में कहा कि फलां को जिद है बिजलियां गिराने की, हमें भी जिद है आसमान पाने की... इस तरह की जिद को अध्ययनशीलता के माध्यम से मां सरस्वती के चरणों में वंदन का दिन है। आत्मा की मौन भाषा को समझने और लक्ष्य तक पहुंचने की नई ऊर्जा का संचार करता है यह पर्व। संकल्प के साथ आज एक सकारात्मक लक्ष्य पूरा करने की जिद करें।