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एक परिवार की तकलीफ देख बने अंतिम संस्कार एक्सपर्ट

5 वर्ष पहले
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खुदकैंसर से लड़कर मौत से लड़ाई जीत चुके पाली के गुमानमल भंसाली आज शहर में लावारिश बेसहारा लोगों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार करने के संकल्प के लिए जाने जाते हैं। सामाजिक सेवा का ये जुनून पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है। उनके बच्चों में भी ऐसा ही जुनून है। कई बार रात के समय भी दूर-दराज क्षेत्र में एक्सीडेंट होने की सूचना पर जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर घायलों की सेवा करना वे अपना कर्तव्य समझते हैं। इनकी प्रेरणा संकल्प से आज कई समाजसेवी उनके साथ जुड़कर इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं गुमानमल भंसाली ने रेडक्रॉस सोसायटी महावीर इंटरनेशनल से जुड़कर दुर्घटना प्रकोष्ठ का गठन भी करवाया है।

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मारवाड़र| से हो चुके हैं सम्मानित

भंसाली के सेवा कार्य को देखते हुए पाली मंडली मुंबई 2014 में मारवाड़ र| से सम्मानित कर चुकी है। नारायण सेवा संस्थान उदयपुर की आेर से सेवा श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका खेलकूद में श्रेष्ठ योगदान रहा है। अपने जमाने में वे कबड्डी के श्रेष्ठ खिलाड़ी रहे। राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र में भंसाली भारतीय युवा मोर्चा के महामंत्री, नगर परिषद में डिप्टी चेयरमैन, जैन युवा संगठन के अध्यक्ष, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा पिंजरा पोल गोशाला, ओसवाल श्रीसंघ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समेत कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हैं।

एक साथ 5-5 शवों का दाह संस्कार : भंसालीबताते हैं ऐसे तो पूरे जीवन में कई बड़ी घटनाएं हुई, जिसमें शव का अंतिम संस्कार किया। मार्मिक घटनाओं में लोढ़ा परिवार के सदस्यों का देसूरी की नाल में एक्सीडेंट हुआ था। उस समय पांच जनों की एक साथ मौत हो गई थी। इसके अलावा पोरवाल परिवार के सदस्यों की भी एक घटना थी, जिसमें पांच जनों की एक साथ मौत हुई थी। शवों का एक साथ दाह संस्कार करना हृदयविदारक घटना थी।

15 वर्ष के थे तब बड़े भाई के साथ गए थे पहले अंतिम संस्कार में

भंसालीने बताया कि उनके बड़े भाई घेवरचंद भंसाली बायतू (बाड़मेर) में किसी परिचित के दाह संस्कार में गए थे। वहां कुछ दिक्कतें आईं और प्रक्रिया देख मन विचलित हुआ। तब बड़े भाई ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाई और संस्कार पूर्ण करवाया। उसी दिन से ठान लिया कि अंतिम संस्कार का कार्य बहुत बड़ा पवित्र होता है। उनके संकल्प में पूरा ही परिवार सहयोग कर रहा है। प|ी उनके दोनों बेटे इस पावन कर्म में रात दिन जुटे रहते हैं। समर्पण का भाव इस हद तक है कि गुमानजी की जवानी से बुढ़ापे उनके बच्चों का बचपन भी इसी में समर्पित हो रहा है।

अब तक 200 से अधिक लावारिश लाशों का कर चुके हैं अंतिम संस्कार

गुमानमलभंसाली ने बताया कि जीवन में अब तक 200 से अधिक लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार किया है। कई बार सड़क दुर्घटना में किसी की मौत होने पर क्षत-विक्षत शव का अंतिम संस्कार भी किया है। खुद अपने बूते पर लाश को वाहन में लाकर उसका अंतिम संस्कार भी किया। इसके अलावा सामाजिक तौर पर भी 2000 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार करवाया। वे बताते है जब भी कोई लोकाचार की सूचना मिलती है तुरंत वहां पहुंच जाता हैं।

बन गए एक्सपर्ट- समाजसेवीगुमानमल भंसाली माने जाते हैं अंतिम संस्कार के एक्सपर्ट, अपनी ही तकनीक से महज पौन घंटे में पूरे विधि-विधान के साथ करवा देते हैं संस्कार, खुद ने भी कैंसर से लड़कर हराया मौत को।

2200 से ज्यादा अंतिम संस्कार- 15साल की उम्र में किसी के अंतिम संस्कार में गए, प्रक्रिया देख तकलीफ हुई, सूचना मिलने पर पहुंच जाते हैं श्मशान में, खुद के कंधों पर ले लेते हैं शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी।

गणतंत्र दिवस समारोह में भंसाली को सम्मानित किया गया। -फाइल फोटो

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