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श्रमिक अब तीन साल में कर सकेगा अपना वाद प्रस्तुत
राज्यसरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव करते हुए अब औद्योगिक विवाद प्रस्तुत करने के लिए समय सीमा तय कर दी है। साथ ही ठेका श्रम लाइसेंस के लिए श्रमिकों की संख्या की सीमा भी बढ़ा दी गई है।
उल्लेखनीय है कि पहले किसी भी तरह का विवाद सुलझाने के लिए समय सीमा तय नहीं थी। श्रमिक कभी भी शिकायत कर सकता था, लेकिन अब सरकार ने इस कानून में बदलाव कर दिया। कानून में बदलाव के तहत श्रमिक को अब तीन साल के अंदर-अंदर अपनी शिकायत प्रस्तुत करनी होगी। इसी तरह पहले 20 या उससे अधिक ठेका श्रमिक रखने पर ठेकेदारी लाइसेंस लेना आवश्यक होता था, जिसकी भी सीमा बढ़ाकर अब 50 या उससे अधिक कर दी गई है। कारखाना अधिनियम के तहत पूर्व में शक्ति संचालित संस्थानों में 10 या इससे अधिक एवं बिना शक्ति संचालित कारखानों में बीस श्रमिक होने या इससे अधिक श्रमिकों के नियोजित होने पर कारखाना अधिनियम के तहत पंजीयन कराना आवश्यक था। अब संशोधन के बाद श्रमिकों की संख्या क्रमश: 20 एवं 40 कर दी गई है। ट्रेड यूनियन एक्ट में बदलाव करते हुए सरकार ने सदस्य श्रमिकों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दी है।