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1971: छिड़ी थी पाकिस्तान से जंग और जवान कुछ यूं कर रहे थे मौत का सामना!

9 वर्ष पहले
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सीकर.देश की आन,बान व शान के लिए जान की बाजी लगा देने वाले शहीदों और पूर्व सैनिकों की वीरता की कहानी युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
वीरता की कहानियां सुनकर युवा गर्व और खुशी के देश सेवा के लिए आगे आ रहे है। यही वजह है कि शेखावाटी के हर कोने के युवा देश की सरहद पर तैनात हैं।दैनिक भास्कर ने भारत पाक युद्ध 1971 के गवाह बने पूर्व सैनिकों से जानी वीरता की कहानी।
विजय दिवस के मायने
भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध हुआ था। भारत ने ये युद्ध लड़ा बांग्लादेश को एक अलग देश का दर्जा दिलाने के लिए। तेरह दिन तक युद्ध के बाद पाकिस्तानी सेना ने ढाका में आत्मसमर्पण कर दिया।
पाकिस्तान ने 16 दिसंबर को समर्पण किया था। इसलिए इस दिन को भारतीय सेना के शौर्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। युद्ध समाप्त होते ही भारत ने नव घोषित बांग्लादेश का शासन वहां के जन नेताओं को सौंप दिया।
ऐसे जीते हम
:1971 का ये युद्ध 13 दिन चला। तीन दिसंबर 1971 को शुरू हुआ ये युद्ध 16 दिसंबर को खत्म हुआ।
:इस युद्ध में भारतीय सेना के करीब 4000 सैनिक शहीद हुए। सीकर जिले के 48 सैनिक इस युद्ध में शहीद हुए।
:इस युद्ध में करीब 10 हजार सैनिक घायल हुए। पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने किया आत्मसमर्पण।
:16 दिसंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर हस्ताक्षर हुए समर्पण के दस्तावेज।