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इन मामलों में ले सकते हैं उपभोक्ता फोरम की मदद

7 वर्ष पहले
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सीकर. कईबार लोग अपना मामला लेकर उपभोक्ता फोरम पहुंचते हैं, लेकिन वहां उन्हें पता चलता है कि उनका मामला सुनवाई के योग्य ही नहीं है। उनसे कहा जाता है कि वे उपभोक्ता की कैटेगरी में नहीं आते। दरअसल, उपभोक्ता फोरम में केस दायर करने के लिए सबसे पहले प्राथमिक सुनवाई होती है, जो शिकायत दर्ज करने के 21 दिनों के भीतर ही कर ली जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि शिकायत करने वाला कंज्यूमर है या नहीं।

इनबातों का रखें ध्यान : उपभोक्तासंरक्षण अधिनियम के अनुसार, उपभोक्ता होने की पहली शर्त है - वस्तु खरीदने के लिए या सेवाएं लेने के लिए कीमत चुकाना। यानी सेवा के बदले पैसा चुकाया जाना जरूरी है। कीमत चुकाने का प्रूफ ही आपको कंज्यूमर प्रमाणित कर सकता है। फ्री की सेवा या सामान को लेकर कंज्यूमर कोर्ट में मामला दायर नहीं हो सकता। अगर आपने कोई वस्तु खरीदी नहीं है, लेकिन किसी ने आपको वह भेंट दी है और उसने उसका दाम चुकाया है, तो भी आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं। बस आपके पास कीमत चुकाने का प्रूफ यानी रसीद आदि होनी चाहिए। कई बार ऐसा भी होता है कि आपने रसीद नहीं ली या दुकानदार रसीद ही नहीं देता। ऐसी स्थिति में कभी-कभी कोई और प्रूफ भी काम जाता है - जैसे कोई चीज खरीदने के लिए आपने कुछ एडवांस दिया हो और दुकानदार ने किसी पर्ची पर या विजिटिंग कार्ड पर लिखा हो कि बैलेन्स भुगतान कितना करना है।

कहांकरें शिकायत : उपभोक्ताफोरम में शिकायत दर्ज करते समय यह भी देखा जाता है कि आपकी शिकायत कुल कितनी रकम को लेकर है। 20 लाख रुपए तक के मामले के लिए आप जिला स्तर के फोरम में शिकायत कर सकते हैं। 20 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक का मामला स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल काउंसिल और एक करोड़ से अधिक के मामले के लिए सीधे नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल काउंसिल में जाना होगा। सबसे जरूरी बात यह है कि कंज्यूमर विवाद शुरू होने के 2 साल के भीतर ही शिकायत कर सकता है।