सीकर. केंद्र सरकार ने बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति पर दस साल से लगा प्रतिबंध हटा दिया है। वित्त मंत्रालय से जारी आदेश में कहा गया है कि अब सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी बैंक में कार्यरत कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की भांति ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी।
अनुकंपा नियुक्ति की नीति लागू करते हुए केंद्र ने साफ किया है कि लिपिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामलों में ही नियुक्ति होगी। इसके अलावा प्रकरण विशेष को ध्यान को रखते हुए आयु सीमा में छूट पर भी विचार हो सकता है। साथ ही चल रही अनुग्रह राशि के प्रावधान को बंद कर दिया गया है। अनुकंपा नियुक्ति के पुराने प्रकरणों में बैंकों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को निर्णय लेने को कहा गया है।
यह योजना अगस्त 2014 से लागू मानी जाएगी। सूत्रों के अनुसार औसतन एक वर्ष में 30 से 35 हजार बैंककर्मियों की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। यूपीए सरकार ने 2004 में बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। मोदी सरकार ने प्रतिबंध हटाने से पहले पता लगाया कि बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति के कितने मामले आते हैं? केंद्र सरकार ने संबंधित बैंकों को आदेश दिए हैं कि वे इस योजना को अपने बोर्ड से अनुमोदित कर लागू करें।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने इस बाबत केंद्र और भारतीय बैंक संघ से मांग की थी कि अनुकंपा नियुक्ति को बहाल किया जाए। आंदोलनों में इस मांग को प्रमुखता से शामिल किया गया। अब सरकार ने इस पर सैद्धांतिक समहति दी है। आदेश लागू होने से मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को मदद मिलेगी। बाबूलालशर्मा, यूनिटसमन्वयक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन
बैक डेट से लागू करने की मांग : अनुकंपानियुक्ति के आदेश को 10 साल पहले बंद की गई तिथि से लागू करने की मांग उठ रही है। एसबीबीजे कर्मचारियों के प्रांतीय अधिवेशन में इस प्रस्ताव को पारित किया गया। आदेश को पिछली तिथि से लागू करवाने की मांग को लेकर सरकार को ज्ञापन भेजा गया है।
अबइन परिवारों को मिलेगा लाभ : सेवाकाल के दौरान मृत्यु हुई हो। कर्मचारी द्वारा आत्महत्या करने पर। 55 साल उम्र से पहले स्वास्थ कारणों से सेवा मुक्त हुए हों। उन गुमशुदा कर्मचारियों के परिवारों को जो दो वर्षों से लापता हैं। उन पुराने प्रकरणों में जहां बैंककर्मी के परिवार भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हों।