सीकर। तीन साल बाद फिर से हुए शुरू किसान विकास पत्र (केवीपी) डाकघर के अलावा भारतीय स्टेट बैंक और इससे संबद्ध सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में भी मिलेंगे। बीते समय में बंद हुए केवीपी डाकघरों से ही उपलब्ध होते थे। केंद्र सरकार ने हाल ही किसान विकास पत्र शुरू किए हैं। इसके लिए जारी गजट नोटिफिकेशन डाकघरों-बैंकों में पहुंच चुका है। नई व्यवस्था में डाकघरों के साथ ही बैंकों से नकद भुगतान, स्थानीय चेक और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भी केवीपी लिया जा सकेगा। खरीदार को जमा बचत खाते में डेट्राक्शन (प्रत्याहरण) के लिए पासबुक सहित नकद राशि या चेक देना होगा।
तीन साल पहले 18 करोड़ सालाना था निवेश : तीन साल पहले तक जिले से केवीपी में सालाना करीब 18 करोड़ रुपए का निवेश होता था। जिलेभर के डाकघरों से हर महीने एक से डेढ करोड़ रुपए के किसान विकास पत्र खरीदे जाते थे। इस बार डाकघर के अलावा बैंकों में भी केवीपी मिलने इसमें निवेश ज्यादा होने की उम्मीद है।
कैसे और कौन कर सकेगा केवीपी में निवेश : डाक विभागीय अधिकारियों ने बताया कि केवीपी लेने के लिए एक फार्म भरकर नकद राशि, चेक, डिमांड ड्राफ्ट भी दिए जा सकते हैं। डाक विभाग प्रमाण पत्र के रूप में किसान विकास पत्र जारी करेगा। ये सभी डाकघरों में उपलब्ध होंगे। भारतीय वयस्क नागरिक केवीपी से निवेश कर सकते हैं। खुद के नाम के साथ ही किसी नाबालिग की ओर से भी लिए जा सकते हैं। दो वयस्क संयुक्त रूप से भी ले सकते हैं।
गुम या चोरी होने पर दूसरा हो सकेगा जारी : केवीपी गुम हो जाने, चोरी हो जाने पर दूसरा पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी संतुष्ट होने पर दो जमानतियों पर दूसरा पत्र जारी किया जा सकेगा। पत्र के विकृत हो जाने पर बिना क्षतिपूर्ति, प्रतिभूति के दूसरा पत्र जारी किया जा सकेगा।
ट्रांसफर किया जा सकेगा केवीपी : केवीपी पंजीकरण से संबंधित डाकघर या बैंक से किसी अन्य डाकघर या बैंक को एक साल बाद ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके लिए ग्राहक को प्रारूप ‘ख’ में आवेदन करना होगा। केवीपी ग्राहक के निधन पर उत्तराधिकारी व्यक्ति, अदालती आदेश पर, संयुक्त धारकों में से किसी का निधन हो जाने पर एक साल के दरमियान भी ट्रांसफर किया जा सकेगा। केवीपी धारक का निधन हो जाने पर किसी व्यक्ति को नामित किया जा सकेगा। पहली बार नामांकन करना निशुल्क रहेगा, लेकिन इससे अधिक बार नामांकन करने या नाम हटवाने पर डाकघर या बैंक द्वारा 20 रुपए प्रत्येक आवेदन पर वसूले जाएंगे।
केवीपी इसलिए बेहतर : डाकघरों की अन्य बचत स्कीम और केवीपी में ब्याज दर लगभग समान है, लेकिन केवीपी की राशि ढाई साल में मैच्योर होकर निकाली जा सकती है। असीमित निवेश किया जा सकता है, जबकि बाकी सभी स्कीमों में सीमा है। एमआईएस में 4.5 लाख (वरिष्ठ नागरिक के लिए 15 लाख) ही निवेश संभव है। राशि दुगुनी होने की समय सीमा 100 माह (8 साल 4 माह) के बाद भी राशि नहीं निकालने पर बचत खाते की दर से ब्याज मिलता मिलना जारी रहता है। 10 हजार रुपए तक राशि नगद निवेश कर सकेंगे।