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तीन गुना बढ़ा साइबर अपराध पुलिस के पास एक्सपर्ट नहीं
क्राइमका ट्रेंड लगातार बदल रहा है। साइबर अपराध के मामलों में पिछले सालों में तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई है लेकिन इन मामलों के खुलासे के लिए जिला पुलिस के पास एक्सपर्ट नहीं हैं। कहने को तो जिला स्तर पर साइबर सेल बनी हुई है। इसमें सिर्फ कॉल डिटेल निकालने का काम हो सकता है।
फेसबुक, वाट्सएप और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों में पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है। ऐसे मामलों में केवल 20 फीसदी में ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच पा रही है। ऑनलाइन ठगी और शॉपिंग के ज्यादातर मामलों को लेकर तो जिला पुलिस के थानों में यह तक जानकारी नहीं है कि वे साइबर अपराध की श्रेणी में आने चाहिए या नहीं। इन मामलों को पुलिस धोखाधड़ी में ही दर्ज कर रही है।
इसके बाद भी जो मामले साइबर अपराध में दर्ज किए जा रहे हैं उनमें पिछले डेढ़ साल में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। 2011 12 तक जहां एक साल में सात या आठ मामले इस अपराध के तहत दर्ज किए जा रहे थे वही संख्या अब 20 तक पहुंच गई है। इन सबके बीच बड़ी बात यह है कि पुलिस केवल चार मामलों में ही आरोपियों तक पहुंच पाई और चालान पेश किया गया। आधे मामलों में तो सिर्फ इसीलिए एफआर लगाई गई कि आरोपी का पता नहीं चल पाया है।
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जनवरी से अनिवार्य करेंगे ट्रेनिंग : एएसपी
एक्सपर्ट | नहींहैं आईटी मामलों की जांच के लिए : ऐसेमामलों की जांच के लिए भी कोई विशेष प्रबंध नहीं हैं। थाना स्तर पर ही इनकी जांच की जा रही है। जो जांच अधिकारी हैं वे तो आईटी के एक्सपर्ट हैं और हीं उनके पास ऐसे संसाधन हैं।
साइबरसेल | सिर्फकॉल डिटेल तक
सीमित : जिलेमें साइबर सेल तो बनी हुई है लेकिन इसके लिए पुलिस के पास कोई एक्सपर्ट नहीं है। कुछ पुलिसकर्मी ट्रेनिंग भी लेकर आए, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण ये केवल कॉल डिटेल और लोकेशन निकाल सकते हैैं।
ट्रेनिंग| पूरेस्टाफ को नहीं दी जाती
जानकारी : प्रदेशमें केवल एसओजी और एटीएस के पास ही टेक्नीकल एक्सपर्ट हैं। पुलिस मुख्यालय इनसे हर जिले के पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग भी दिलवाता है। ट्रेनिंग में शामिल होने वाले लौटकर किसी को जानकारी नहीं देते हैं।
एक्सपर्ट नहीं होने के मामले में एएसपी प्रकाश कुमार शर्मा का कहना है कि जिले में पुलिसकर्मी ही यह काम कर रहे हैं। यहां अलग से एक्सपर्ट नहीं है। थानों तक