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शहर में खुलेआम बिक रहे हैं रंगे हुए चूजे, कार्रवाई कोई नहीं कर रहा

7 वर्ष पहले
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पक्षियोंके साथ जिले में सरेआम क्रूरता हो रही है। चूजों के रंग कर उन्हें बेचा जा रहा है। जबकि पशु क्रूरता अधिनियम के तहत ऐसा करना अपराध है। इसके बावजूद बेरोकटोक जिले में एक गिरोह रंग करके चूजे बेच रहा है।

दैनिक भास्कर ने इस मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि कल्याण सर्किल, बजरंग कांटा, पिपराली पुलिया बस स्टैंड के पास ऐसे चूजे बेचे जा रहे थे। पक्षियों के प्रति अपराध को लेकर पशुक्रूरता निवारण समिति की जिम्मेदारी है, लेकिन उनकी ओर से भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

...और उतरने लगा रंग

पानी डाला।

पिंजरे में ठूंस-ठूंस कर भरे गए चूजे। फोटो: विशाल सैनी

^चूजे वन्य जीव की श्रेणी में नहीं आते, फिर भी अगर क्रूरता की जा रही है तो गलत है। -राजेंद्र कुमार हुड्‌डा, डीएफओ

^रंगे हुए चूजे बेचे जा रहे हंै तो कार्रवाई की जाएगी। हनुमानसिंह पालवास, उपाध्यक्ष,जिला पशुक्रूरता निवारण समिति

40 साल से पशु-पक्षियों की सेवा से जुड़े गोकुलप्रसाद माथुर का कहना है कि रंग करना पक्षियों के साथ अन्याय है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। स्वयंसेवी संगठनों के साथ आवाज उठाएंगे।

पशुक्रूरता एक्ट 1960 की धारा 11, 12 21 में पक्षी को कलर करना, पिंजरे में रखना, ठूंसठूंस कर परिवहन करना, धूप में रखने को पशुक्रूरता की श्रेणी में माना गया है। एक्ट के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर पांच हजार रुपए तक जुर्माने सजा का प्रावधान है।

ऐसा करना अत्याचार : माथुर

यह कहता है कानून

दावा : प्राकृतिकहै रंग, 15 रु. कीमत

एसकेस्कूल के सामने एक व्यक्ति कलर किए हुए चूजे बेच रहा था। अनीस निवासी अलीगढ़ से इसकी कीमत पूछी तो बताया कि 15 रुपए में मिलेगा। शख्स ने दावा कि चूजे अलग-अलग रंग और प्रजाति के हैं। इनपर किसी तरह का कलर नहीं किया गया है।

हकीकत: पानीडालते ही उतरा कलर

जबचूजों पर पानी डाला गया तो कलर उतरने लग गया। शख्स ने बताया कि चार-पांच ग्रुप जिले में ऐसे चूजे बेच रहे हैं। हर दिन शहर में ही 200 से ज्यादा चूजे बेचे जा रहे हैं। उसने बताया कि दिल्ली से 4000 चूजे खरीदकर लाते हैं। वहां मशीन के जरिए कलर किया जाता है।