सीकर। सरकार की ओर से बनाए जा रहे भामाशाह कार्डों को राशन कार्ड से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राशन वितरण का रिकॉर्ड भी बायोमेट्रिक रखा जाएगा। इस संबंध में सभी जिला कलेक्टर और डीएसओ को निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने आदेश में बताया गया है कि सरकारी योजनाओं की राशि को सीधे परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाना है। राशन वितरण व्यवस्था को भी भामाशाह कार्ड से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए जैसे-जैसे भामाशाह कार्ड तैयार हो रहे हैं। उन्हें राशन कार्ड से मिलान कर लिंक किया जाए। हर महीने की 20 तारीख को इसकी अपडेट सूचना मुख्यालय भिजवानी होगी। इसका उद्देश्य राशन वितरण में अनियमितता रोकना है।
नई व्यवस्था में यह है बड़ी चुनौती
डाटा फीडिंग : वितरण का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखने से पहले डीलर वार तमाम राशनकार्ड धारकों का डाटा फीड करना होगा। इसमें बड़ी परेशानी यह है कि इसका काम समय पर पूरा हो। क्योंकि पूर्व में राशन कार्ड बनाने में भी एक साल से ज्यादा वक्त लग गया।
भामाशाह कार्ड का काम भी पूरा नहीं : जिले में अभी तक भामाशाह कार्ड का काम पूरा नहीं हो पाया है। वार्ड वार शिविर लगाकर भामाशाह कार्ड बनाए जा रहे हैं। ऐसे में कार्ड बनने के साथ इसे राशन कार्ड से लिंक करने का काम पूरा करना भी चुनौती है।
गड़बड़ी रोकना चुनौती : भामाशाह कार्ड और राशन कार्ड को लिंक करने में गड़बड़ी को रोकना भी बड़ी चुनौती हैं। रसद विभाग पहले ही 22 हजार लोगों को दोहरे राशन कार्ड का नोटिस जारी कर चुका है। खाद्य सुरक्षा में योजना में शामिल नहीं होने वाले परिवारों के राशन कार्ड पर भी सरपंचों ने पात्रता की मुहर लगा दी।
जिले में हैं 900 राशन डीलर
जिले में 900 डीलर और सोसायटी राशन वितरण व्यवस्था से जुड़ी हुई है। इन डीलरों द्वारा जिले के साढ़े चार लाख परिवारों को हर महीने अलग-अलग श्रेणियों में राशन वितरण किया जा रहा है।
डीलरों को दी जाएगी पीओएस मशीन
रिकॉर्ड ऑनलाइन करने के लिए राशन डीलरों को पीओएस मशीन दी जाएगी। इसका काम निजी एजेंसी राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज को दिया गया है। एजेंसी की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।