सीकर। फर्जी कंपनियां बनाकर दूसरे राज्यों से तस्करी की नकली शराब जिले में भेजी जा रही है। जिन कंपनियों के लेबल बोतलों पर लगे हुए आते हैं उनकी जांच की तो यह सामने आया कि वे कंपनी अस्तित्व में ही नहीं हैं। आबकारी विभाग की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। यह शराब जानलेवा हो सकती हैै। बड़ा सवाल यह है कि दूसरे राज्यों में अगर नकली शराब बन रही है तो आसानी से यह शराब प्रदेश में कैसे आ जाती है?
दूसरे राज्यों से तस्करी की जो शराब आती है उनपर हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व अरुणाचल प्रदेश के लेबल लगे होते हैं। जब आबकारी विभाग ने जांच की तो पता चला कि इस तरह की कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं है। ऐसे में आशंका है कि यह शराब किसी ने अपने स्तर पर गलत तरीके से बनाई है और यहां बिक्री के लिए भेज दी। बिना जांच के आने वाली यह शराब कब जानलेवा बन जाए, तय नहीं है। सीकर में आबकारी विभाग ने एक साल में 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए। इनमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व अरुणाचल सहित कई राज्यों के लेबल लगी हजारों बोतल शराब जब्त की गई।
यूं बना रहे हैं नकली शराब, महंगे ब्रांड भी हो रहे हैं तैयार : आबकारी सूत्रों के मुताबिक कई तरह के जानलेवा केमिकल मिलाकर नकली शराब बनाई जाती है। दूसरे राज्यों से कई बड़े ब्रांड के नाम भी लगा दिए जाते हैं। एक ही तरह का घोल तैयार किया जाता है। जिस भी तरह की बोतल में भरते हैं उसकी कंपनी का लेबल लगा दिया जाता है।
इस तरह जानलेवा हो सकती है : नकली शराब में कई तरह के जानलेवा कैमिकल काम में लेते हैं। निश्चित अनुपात में पानी मिलाया जाता है। बनाने वाले के पास क्वालिटी चैक का कोई सिस्टम नहीं होता। ऐसे में पानी का अनुपात बिगड़ गया तो शराब जानलेवा हो सकती है। प्रदेश में इस तरह की कई दुखांतिकाएं हो चुकी हैं। लोग केवल सस्ती के फेर में इसे खरीद लेते हैं।
बड़े खतरे की तरफ इशारा करते तीन उदाहरण
1) सीकर आबकारी ने कुछ दिन पहले शराब से भरी एक पिकअप जब्त की। बोतलों पर लिखा हुआ था कि यह केवल अरुणाचल प्रदेश में बिक्री योग्य है। माना जा रहा था कि वहां की सरकारी कंपनी से यह तस्करी की शराब आई है। लिखा था कि यह हिमाचल में हिम गीरी ब्रेवरीज नाम की डिस्टलरी में बनी है। आबकारी टीम वहां पहुंची तो इस नाम की कोई डिस्टलरी नहीं मिली।
2) आबकारी दस्ते ने पिछले साल जनवरी में एक कैंपर को जब्त किया था। जिसमें मिली शराब पर लिखा था कि यह हरियाणा की एनवी डिस्टलरी में बनी है। टीम ने जब एनवी डिस्टलरी में पता किया तो जवाब मिला कि यह शराब उस कंपनी में बनी ही नहीं।
3) पुलिस ने दादिया थाने में पिछले साल एक पूरा ट्रक अवैध शराब का जब्त किया था। उसमें भी हरियाणा की डिस्टलरी का लेबल लगा था। आज तक पुलिस को वह डिस्टलरी ही नहीं मिली।