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गाड़ी में जगह कम पड़ी तो बाल श्रमिकों को ले गए कोतवाली

7 वर्ष पहले
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बालअधिकारिता विभाग, मानव तस्करी सेल बाल कल्याण समिति सहित चार एनजीओ प्रतिनिधियों की ओर से गुरुवार को शहर में स्टेट टू स्कूल अभियान चलाया गया।

अभियान के जरिए उन बच्चों की पहचान की गई, जो बेसहारा हैं या फिर किसी किसी बालश्रम से जुड़े हुए हैं। इस दौरान कुल आठ बच्चों को पकड़ कर गाड़ी में बैठाया गया लेकिन जब गाड़ी में जगह कम पड़ी तो इन्हें सुरक्षा के लिहाज से एक बार कहीं छोड़ने के लिए कोतवाली ले जाना पड़ा। इतनी छोटी उम्र के बच्चों को कोतवाली में देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी चौंक गए। उन्होंने बच्चों को वापस ले जाने की बात कही। इसके बाद बच्चों को वापस गाड़ी में बिठाकर इन्हें किशोर गृह छुड़वाया गया।

बाल अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक गार्गी शर्मा ने बताया कि बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे शपथ पत्र लेकर पाबंद किया जाएगा कि भविष्य में उनसे बाल मजदूरी नहीं कराएंगे और भीख मंगवाएंगे। अनाथ बच्चों को किशोर गृह में रखकर शिक्षा से जोड़ा जाएगा। बच्चों को कोतवाली ले जाने के मामले में सहायक निदेशक का कहना है कि वैन में जगह कम थी। सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को कोतवाली ले गए थे। अभियान के दौरान मानस तस्करी सेल के एएसआई भवानी सिंह शेखावत, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रामप्रसाद शर्मा, दशरथ मनोविकास संस्थान के सचिव धर्मेंद्र शर्मा, विपिन कल्याण परिषद के सचिव अभिषेक माथुर, परमार्थ सेवा समिति के सचिव महेंद्र शर्मा सहित कस्तूरबा सेवा संस्थान के प्रतिनिधि संजय शर्मा मौजूद थे।

भाग-भागकर पकड़ा बच्चों को : अभियानके दौरान बच्चों को पकड़ने के लिए पदाधिकारियों को दौड़ लगानी पड़ी। मांग कर खाने वाले बच्चे गाड़ी को देखकर ही गलियों में भाग छूटे। जिन्हें बाद में मुश्किल से पकड़ा गया। ब्रिजकोर्स के बाद बच्चों का होगा स्कूल में नामांकन : पदाधिकारियोंकी टीम श्री करणी अनौपचारिक प्राथमिक विद्यालय बंजारा बस्ती में पहुंची। यहां पढ़ने वाले बच्चों के बारे में निर्णय लिया गया कि तीन महीने के ब्रिज कोर्स के बाद इनका नामांकन हरदयाल स्कूल में कराया जाएगा।

बच्चों को कोतवाली लेकर जाते हुए।