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नगर परिषद के बजट की प्लानिंग शंकर के भरोसे
शहरीविकास के लिए नगर परिषद द्वारा प्लानिंग के साथ बजट तैयार नहीं किया जाता है। तय नहीं किया जाता कि राशि कहां और कैसे खर्च की जानी है। इस बार एओ नहीं होने से यह मुश्किल और भी बढ़ गई है। तीन साल से परिषद के बजट में अहम भूमिका निभाने वाले एओ शंकरलाल शर्मा का तबादला पेंशन विभाग में हो गया। फिलहाल इनके पास नगर परिषद का अतिरिक्त चार्ज है। लेकिन शर्मा पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं।
बिना प्लानिंग के बजट तैयार होने के कारण तय पैसा खर्च नहीं हो पाता है। इस बार भी नगर परिषद करीब 155 करोड़ रुपए का बजट पेश करने की तैयारी में है। पिछली बार परिषद ने 129 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। लेकिन नए प्रस्ताव और संशोधन के बाद यह 141 करोड़ हो गया। पिछले बजट में कई मदों में रुपए तय किए जाने के बाद भी खर्च नहीं किए गए। शहर का डवलपमेंट भी बिना प्लानिंग के बजट जारी होने के कारण व्यवस्थित तरीके से नहीं हो रहा है। कई मद ऐसी हैं, जिनमें करोड़ों रुपए की व्यवस्था किए जाने के बाद भी नाम मात्र का पैसा खर्च किया जाता है। इसके बावजूद इस साल फिर इन मदों में पैसे की व्यवस्था की जा रही है।
मद पहले मिला अब मिल सकता है
कर्मचारीवेतन, भत्ते, 13.52करोड़15करोड़
जनप्रतिनिधियों का मानदेय
कार्यालयों की मरम्मत 30लाख50लाख
मजदूरी, वाहन
ब्याज सहायता खर्च 1करोड़1.25करोड़
प्रशासकीय खर्च 1.33करोड़1.60करोड़
अन्य अग्रिम व्यय 13करोड़15करोड़
अन्य खर्च 20करोड़23करोड़
भूमि-भवन 17करोड़20करोड़
सड़क नाली निर्माण 35करोड़50करोड़
सफाई 20.27करोड़23करोड़
बिजली 3.70करोड़4.50करोड़
पशुओं का चारा 1करोड़1.20करोड़
उद्यान 75लाखएककरोड़
एजेंडे में शामिल लेकिन तय नहीं होते पैसे
नगरपरिषद के एजेंडे में कई जरूरी मदें शामिल की जाती हैं। लेकिन इनके लिए बजट की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। इसमें खेल स्टेडियम, पार्किंग स्थल, बाजार परिसर, खेल सामग्री खरीद व्यवस्था आदि शामिल हैं।
^कर्मचारी-अधिकारियों के चुनाव में लगे होने के कारण बोर्ड बैठक नहीं हो पाई। पार्षदों से विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं। जल्द ही बोर्ड बैठक का समय तय किया जाएगा। जीवणखां, सभापति, नगर परिषद
^कॉलोनियोंमें सीवरेज की परेशानी है। लोगों ने आम रास्तों में चेंबर बना रखे हैं। जिनसे आए दिन हादसे हो रहे हैं। बोर्ड बैठक हो तो इस पर भी कुछ फैसला हो सके। अशोकचौधरी, पार्षद, वार्ड 24
^शहरमें सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई। लेकिन पार्किंग तय नहीं से फायदा नहीं मिल पा रहा है। बोर्ड बैठक नहीं होने से चर्चा नहीं हो पा रही है। विश्वनाथसैनी, पार्षद, वार्ड 28
ढाई महीने बाद भी नहीं हुई बोर्ड बैठक
शहरीसरकार बनने के ढाई महीने बाद भी बोर्ड बैठक नहीं हो पाई है। बैठक नहीं होने के कारण पूर्व में स्वीकृत कामों को भी रफ्तार नहीं मिल पाई है। पिछली बोर्ड बैठक में 10 लाख रुपए से ज्यादा की लागत वाले काम स्वीकृत नहीं हो पाए। शहरी सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि कामकाज जल्द शुरू होगा। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। इससे शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी हो रही है तो निर्माण, कचरा निस्तारण, सीवरेज, ड्रेनेज जैसे कामों पर कोई चर्चा तक नहीं हो पाई है। बोर्ड बैठक की मांग को लेकर सोमवार को कुछ पार्षद आयुक्त से भी मिले।
पुराने फॉरमेट में बढ़ाया जाता है पैसा
बजटको लेकर नगर परिषद का फॉरमेट तय है। इस फॉरमेट में ही नगर परिषद के अधिकारी पिछले बजट का आंकलन कर पैसा कम ज्यादा करते हैं। भास्कर की ओर से नगर परिषद चुनावों से पहले वार्ड वार करवाए गए रूबरू कार्यक्रम में लोगों ने सुझाव दिया था कि वार्ड वार शहर का रिपोर्ट कार्ड बनाया जाए। इसके आधार पर प्रमुख कामों को शामिल करते हुए बजट तय किया जाए।
तयहोती है रािश लेकिन खर्च नहीं
बजटमें कई ऐसी मद हैं, जिन पर पैसा तय कर लिया जाता है। लेकिन खर्च नहीं किया जाता। वित्तीय वर्ष 2013-14 में नाला नाली मरम्मत, आईडीएसएमटी योजना आदि के लिए करोड़़ों रुपए की व्यवस्था की गई। लेकिन किसी मद में पैसा खर्च नहीं किया तो किसी में नाम मात्र का। इसके बावजूद 2014-15 के बजट में इन मदों में और पैसों की व्यवस्था करना बताया गया है।
नगर परिषद में समितियों के गठन को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। इस बार बोर्ड कांग्रेस और राज्य सरकार भाजपा की होने के कारण पार्षदों को उम्मीद थी कि जल्द ही समितियों का गठन होगा। लेकिन बोर्ड गठन के 75 दिन बाद भी इस पर कार्रवाई नहीं हो पाई। इसे लेकर विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के पार्षदों में भी नाराजगी है। समितियों के गठन के लिए विपक्ष और सत्ता पक्ष के पार्षद साथ हो सकते हैं। शहरी सरकार गठन के 90 दिन तक समितियां बना सकती है। इसके बाद भी समितियों का गठन नहीं होने पर राज्य सरकार अपने स्तर पर समितियों का गठन कर सकती है।