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सूर्य कल कर्क राशि में करेंगे प्रवेश, दक्षिणायन होंगे

4 वर्ष पहले
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श्रावणअथवा कर्क संक्रांति में सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। श्रावण संक्रान्ति का पर्व इस वर्ष 16 जुलाई को है। इस दिन से सूर्य दक्षिणायन होते हैं। संक्रांति के पुण्य काल के समय नियम जप तप दान एवं पूजा पाठ इत्यादि का विशेष महत्व होता है। इस समय पर किए गए दान पुण्य का कई गुना फल प्राप्त होता है। ऐसे में ईश आराधना विशेष रूप से शंकर भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। सूर्य का एक राशि से दूसरा राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है। सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश ही कर्क संक्रांति या श्रावण संक्रांति कहलाता है। सूर्य के उत्तरायण होने को मकर संक्रांति तथा दक्षिणायन होने को कर्क संक्रांति कहते हैं।

कर्क संक्रांति में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि शास्त्रों एवं धर्म के अनुसार उत्तरायण का समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन देवताओं की रात्रि होती है। इस प्रकार वैदिक काल से उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृ-यान कहा जाता रहा है। इस संक्रांति का वार नाम घोड़ा है, जो सुख समृद्धि दायक रहेगा। संक्रांति का वाहन बाघ उप-वाहन घोड़ा है जो सुख शांति का द्योतक है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए संक्रांति शुभ रहेगी, लेकिन व्यापारी वर्ग को सावधानी से कार्य करना होगा। कर्क राशि जल तत्व राशि होने से सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के साथ ही वर्षा के योग बनेंगे। इस बार 16 जुलाई से अच्छी वर्षा के योग बन रहे है। जहां अब तक बारिश नहीं हुई वहां भी अच्छी वर्षा होगी। कर्क संक्रांति के काल में भगवान शिव की पूजा विधान है। इस दिन से सूर्य देव दक्षिणायन हो जाएंगे। श्रावण माह से पौष माह तक भगवान सूर्यदेव उत्तरी छोर से दक्षिणी छोर की यात्रा करते है।

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