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सरकार ने शिविर का समय तो एक माह बढ़ा दिया लेकिन परिषद को पट्‌टेे का अधिकार ही नहीं दिया

4 वर्ष पहले
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आमजनको पट्टे जारी करने सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लगाए गए मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण शिविर 10 जुलाई को खत्म हो गए। सरकार ने 11 अगस्त तक के लिए फॉलोअप के नाम पर एक महीने शिविर बढ़ा दिया। लेकिन नगर परिषद को 10 जुलाई तक कृषि भूमि पर पट्टे जारी करने के अधिकार की समय अवधि नहीं बढ़ाई। पट्टे जारी किए जाने का अधिकार नहीं होने के कारण नगर परिषद प्रशासन लंबित ले आउट प्लान मंजूरी के लिए एम्पावर्ड कमेटी की मीटिंग में नहीं रख रहा हैं।

सभापति-आयुक्त के बीच विवाद के कारण 10 जुलाई को एम्पावर्ड कमेटी की मीटिंग नहीं हो सकी। अगर, मीटिंग होती तो शहरी क्षेत्र में तैयारी करवाए गए 50 ज्यादा ले आउट प्लान मंजूर हो जाते। इससे करीब आठ हजार लोगों को पट्टे जारी हो जाते। शहरी क्षेत्र के ले आउट प्लान अनुमोदन को मामला करीब एक साल से अटका हुआ है। पूर्व में भी सरकार ने ले आउट प्लान मंजूर करने के लिए छूट दी थी। लेकिन उस दौरान समय पर ले आउट तैयार नहीं हो पाए।

इसके बाद सरकार ने सीकर सहित पांच जिलों में कृषि भूमि के 90ए की कार्रवाई पट्टे जारी करने का अधिकारी संबंधित यूआईटी को दे दिया। 10 मई से शुरू हुए मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण शिविर के पहले सरकार ने इस आदेश को वापस ले लिया। सरकार ने छूट देते हुए आदेश दिया कि इन पांचों जिलों में नगर परिषद 10 जुलाई तक कृषि भूमि पर पट्टे जारी कर सकेगी। बोर्ड मीटिंग के इंतजार में कामकाज नहीं रुके। इसके लिए एम्पावर्ड कमेटी का गठन कर दिया गया। कमेटी को बोर्ड केे अधिकार दिए गए। बोर्ड में रखी जाने वाली तमाम फाइलें एम्पावर्ड कमेटी द्वारा मंजूर की जानी थी। नगर परिषद क्षेत्र के लंबित ले आउट प्लान भी इसी कमेटी के जरिए स्वीकृत किए जाने थे। लेकिन सभापति-आयुक्त के बीच हुए विवाद में शहर की जनता को सरकार के शिविर का फायदा नहीं मिल पाया।

शिविरमें होने हैं थे काम : शिविरमें कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का नियमन, सिवायचक भूमि पर कॉलोनी आवासों को नियमन, स्टेट ग्रांट एक्ट के अंतर्गत पट्टे जारी करना, कच्ची बस्ती नियमन, खांचा भूमि का आवंटन, निकायों द्वारा आवंटन भू-खंडों के बढ़े हुए क्षेत्रफल का नियमन, भवन मानचित्र अनुमोदन निर्माण स्वीकृति, कृषि भूमि के अकृषि प्रयोजनार्थ रूपान्तरण/नियमन पट्टा एवं साईट प्लान जारी करना, भूखंडों का उपविभाजन/पुनर्गठन, बकाया लीज एवं नगरीय विकास कर की ब्याज राशि में छूट देकर वसूली सिवायचक भूमि का नगरीय निकायों को हस्तांतरण, सिलिंग अधिनियम, अल्सर अधिनियम, भू-स्वामियों की संपदा अर्जन अधिनियम एवं कंस्टोडियम भूमि से प्रभावित योजनाओं में नियमन, आवासन मण्डल, पीडब्लूडी, जलसंसाधन विभाग एवं नगरीय निकायों द्वारा अवाप्त भूमि में आवासीय निर्माणों का नियमन जैसे कार्य होने हैं। फॉलोअप शिविर के तहत यह काम भी किए जाएंगे।

एम्पावर्ड कमेटी 31 दिसंबर तक प्रभावी, लेकिन पट्‌टे का अधिकार नहीं | अभियानके दौरान कामकाज सुचारू हो सकें। इसके लिए एम्पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि एम्पावर्ड कमेटी 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेगी। लेकिन सीकर सहित पांच जिलों में नगर परिषद को सिर्फ 10 जुलाई तक पट्टे के अधिकार होने के कारण दिसंबर तक के लिए बनाई गई एम्पावर्ड कमेटी का जनता को कोई फायदा नहीं मिल पाएगा।

^एक महीने फॉलोअप शिविर लगाए जाएंगे। एम्पावर्ड कमेटी को दिए गए अधिकार 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेंगे। ले आउट प्लान आदि मंजूर करने के संबंध में अधिकार वापस स्पष्ट कर दिए जाएंगे। मंजीतसिंह,प्रमुख शासन सचिव, स्वायत शासन विभाग

शिविर में जमा ली गई स्टेट ग्रांट एक्ट की फाइलों पर एक भी पट्टा जारी नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार नगर परिषद के पास 172 फाइलें जमा हुई। इन्हें संबंधित कर्मचारियों को जांच रिपोर्ट के लिए भेज दिया गया। करीब 20 फाइले तैयार कर एम्पावर्ड कमेटी के पास भेजी गई। लेकिन एसडीएम ने दस्तावेजों सहित अन्य कमियां बताकर फाइलें रद्द कर दी। शिविर के दौरान परिषद में लंबित 506 स्टेट ग्रांट की फाइलों में से 156 पर पट्टे जारी किए गए।

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