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जीएसटी का बंधन : नारियल पर 12, मिठाई पर 5% टैक्स, राखी पर ?

4 वर्ष पहले
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रक्षाबंधनको लेकर इस बार बाजार अभी तक नहीं सज पाया है। इसकी बड़ी वजह जीएसटी को माना जा रहा है। सीकर में ज्यादातर व्यापारी कोलकाता सहित अन्य बाहरी इलाकों से राखी मंगवाते हैं। राखी पर जीएसटी स्पष्ट नहीं होने के कारण व्यापारी राखियों का बड़ा स्टॉक मंगवाने से बच रहे हैं। वहीं स्थानीय खुदरा व्यापारी भी खरीदारी नहीं कर रहे हैं। जिले में औसतन रक्षाबंधन पर करीब छह करोड़ रुपए का कारोबार होता है। त्योहार में 15 दिन ही बचे हैं। इसके बावजूद कारोबार 25 फीसदी भी नहीं हो पाया है।

बहनों को इस बार रक्षाबंधन पर पहले की तुलना ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। क्योंकि शगुन के तौर पर दिए जाने वाले नारियल पर 12 फीसदी और मिठाई पर पांच फीसदी जीएसटी लागू किया गया है। राखी के थोक कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी से पहले कुछ व्यापारियों ने राखी का स्टॉक कर लिया। लेकिन जीएसटी के कारण छोटे व्यापारी खरीदारी के लिए नहीं रहे हैं। व्यापारी श्याम सुंदर का कहना है कि पहले के मुकाबले इस बार 25 प्रतिशत ग्राहकी भी नहीं हुई। जीएसटी लागू होने के बाद से ट्रांसपोर्टेशन की समस्या हो गई है। क्योंकि माल खरीदार और बेचने वाले दोनों व्यापारियों को ट्रांसपोर्टर को जीएसटी नंबर देना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यह सीजनली कारोबार है। ऐसे में छोटे कारोबारी जीएसटी नंबर नहीं दे पा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सामान्य रक्षासूत्र पर तो टैक्स नहीं है। लेकिन दूसरी राखियों पर लगने वाले टैक्स को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से थोक और खुदरा दोनों तरह के व्यापारी ही माल लेने से कतरा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सरकार की हेल्पलाइन पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।

मिठाई पर पांच फीसदी जीएसटी लागू किया गया है। जानकारों के अनुसार जिलेभर में राखी के त्यौहार पर करीब 10 करोड़ रुपए की मिठाई का कारोबार होता है। ऐसे में पांच फीसदी जीएसटी के आधार पर 50 लाख रुपए का टैक्स चुकाना होगा। इसी तरह नारियल पर 12 फीसदी टैक्स लागू किया गया है। औसतन एक परिवार में चार नारियल के आधार पर जिलेभर में रक्षाबंधन पर करीब 12 लाख नारियल की बिक्री की अनुमान है।

स्थानीय स्तर पर राखियां बनाने से मिला रोजगार | कुछबड़े कारोबारी जीएसटी के कारण बाहर से माल मंगवाने की बजाय स्थानीय स्तर पर ही राखी तैयार करवा रहे हैं। ताकि जीएसटी से बच सके। ऐसे व्यापारियों कच्चा घर-घर महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध करवाकर तैयार राखियां ले रहे हैं। इसके बदले उन्हें पैसा मिल रहा है।

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