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कुर्सी, नेम प्लेट इंटरनेट पर 3.79 लाख रु. खर्चे, लेकिन 1.19 करोड़ के बजट के बावजूद जीवन रक्षक उपकरण नहीं खरीदे

4 वर्ष पहले
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एसकेअस्पताल को मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। क्योंकि-मरीजों के इलाज पर मिलने वाली राशि से वह जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के बजाए कर्मचारियों की रिवोवलिंग चेयर, टेबल, शीशें चेंबर के बाहर नेम प्लेट इंटरनेट सुविधा पर पौने चार लाख रुपए खर्च कर दिए। हैरानी यह है कि कर्मचारियों ने अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से इंटरनेट के 46 कनेक्शन तक ले लिए थे। छह महीने में ही इंटरनेट पर ढाई लाख रुपए खर्च हो गए तो विरोध को देखते हुए तो 39 कनेक्शन कटवाने पड़े।

सेहत के प्रति सरकार की लापरवाही का आलम यह है कि जनाना अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और एसके अस्पताल की ट्रोमा यूनिट सहित विभिन्न वार्ड में जरूरी छोटे-छोटे औजारों की खरीद को लगातार टाला जा रहा है। उपकरणों की कमी भर्ती प्रसूताओं, नवजात और मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। मेडिकल रिलीफ सोसायटी के खाते में 1.19 करोड़ का बैंलेंस हैं। इसमें 52 लाख रुपए की एफडी शामिल है। वहीं, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इंश्योरेंस कंपनी से भी एक करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिल चुकी है। यह बजट मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए काम में लिया जाना है, लेकिन अस्पताल मरीजों की सुविधाओं पर पैसे खर्च नहीं करना चाहता। मामले में एसके अस्पताल के डिप्टी कंट्रोलर डॉ. हरिसिंह का कहना है कि कायाकल्प योजना के तहत टेबल-कुर्सी, नेम प्लेट और अन्य सुविधाएं जुटानी होती है। तब जाकर योजना में अस्पताल का चयन हो पाता है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में मिले पैसे को खर्च करने को लेकर फाइनेंस डिपार्टमेंट प्रकरण विचाराधीन है। इसलिए उपकरण नहीं खरीदे जा सके। जनाना अस्पताल में उपकरणों की पूर्ति की जाएगी।

स्टाफ नियुक्ति में भी मनमानी : ड्यूटीजनाना अस्पताल में, लगा रखा है एसके अस्पताल के वार्डों में

एसकेअस्पताल प्रबंधन ने जनाना अस्पताल के लिए जो स्टाफ डेपुटेशन पर मंगवाया, उससे वहां काम नहीं लिया जा रहा है। बल्कि एसके अस्पताल के वार्डों में लगा रखा है। डेढ़ माह में स्टाफ अदला-बदली के एक दर्जन आदेश निकाल चुके है। पैरा मेडिकल स्टाफ ने अस्पताल प्रबंधन पर पैसे लेकर ड्यूटी तय करने के आरोप लगाए है। जूनियर को वार्ड का इंचार्ज बना दिया और सीनियर स्टाफ की नाइट ड्यूटी तय कर रखी है।

67लाख बैंकखाते में, 52 लाख की एफडी करा रखी है मेडिकल रिलीफ सोसायटी ने।

06लाखरुपए की आमदनी होती है आउटडोर-इनडोर रजिस्ट्रेशन से हर महीने।

02लाखरुपए मेडिकल प्रमाण पत्र, डायलिसिस, ब्लड बैंक और आईसीयू में इलाज कराने के एवज में चार्ज वसूला जाता है।

ईसीजी, नेबुलाइजर, ईईजी मशीन और चीरा लगाने वाले औजारों को जंग लगी है। सहायक स्टाफ, हेल्पर ट्रॉलीमैन की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है। सहायक स्टाफ, ट्रॉलीमैन और हेल्पर को संविदा पर रखे जाने की अनुमति दे रखी है। मरीजों को अभी तक नई कलर डॉप्लर सोनोग्राफी मशीन नहीं मिली है।

जनाना अस्पताल शुरू हुए डेढ़ महीने का वक्त हो चुका है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और लेबर रूम में मल्टी पैरा मॉनिटर, कोट्री मशीन, फीटल मॉनिटर जैसे जरूरी उपकरण ही नहीं है। ये उपकरण मरीज की पल्स, धड़कन और ऑपरेशन के चीरा लगाने से रिसते ब्लड को रोकने के काम आते हैं।

एसके अस्पताल

जनाना अस्पताल

}मल्टी पैरामॉनिटर

धड़कन,पल्स और फेफड़ों की स्थिति जांचने की मशीन है। जनाना अस्पताल के आईसीयू में यह नहीं है। एक लाख 35 हजार रुपए के आसपास कीमत है। शुरुआत में आईसीयू में ये मशीन उपलब्ध कराई, लेकिन इसे फिलहाल ऑपरेशन थियेटर में काम लिया जा रहा है।

}सोनोग्राफी मशीन

गर्भवतीमहिलाओं की दान में मिली सोनोग्राफी मशीन से जांच की जाती है। मशीन 13 साल पुरानी तकनीक वाली है। अस्पताल प्रबंधन ने नई सोनोग्राफी मशीन ने डिमांड भिजवाई है, लेकिन अभी तक नहीं पहुंची है।

}सहायकस्टाफ

अस्पतालके वार्डों में सहायक स्टाफ नहीं है। 23 साल पहले 87 जनों का सहायक स्टाफ था। धीरे-धीरे कम होता गया। फिलहाल दो दर्जन स्टाफ काम कर रहा है। वार्ड इंचार्ज ने कई बार सहायक स्टाफ उपलब्ध कराने की डिमांड भेजी, लेकिन हर बार अनसुना कर दिया गया। मरीज को जांच और इलाज के लिए नर्सिंग स्टाफ और उसके परिजन इधर-उधर ले जाते हैं। सहायक स्टाफ की संविदा पर नियुक्ति के लिए विभाग ने परमिशन दे रखी है, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही।

}फीटल मॉनिटर

लेबरमें इसकी जरूरत होती है। कीमत 78 हजार से सवा लाख रुपए तक है। नवजात बच्चे की धड़कन मापने के काम आती है। जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ फीटल मॉनिटर के जरिए धड़कन का पता लगा सकते हैं। परिजनों को भी इसके जरिए नवजात की धड़कन सुनाई जा सकती है।

}कोट्रीमशीन

सिजेरियनऑपरेशन के दौरान बहते ब्लड को रोकने के काम आती है। ऑपरेशन के लिए चीरा लगाने के बाद कई बार महिलाओं की नसों से ब्लड नहीं रुकता। अलग-अलग कंपनियों की मशीन बाजार में उपलब्ध है। 60 हजार से लेकर 1.40 लाख रुपए कीमत है। इसके जरिए नसों को ब्लॉक कर ब्लड रोका जाता है। जनाना अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में ये सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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