पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सरसों में लगा चेपा रोग, पैदावारपर असर

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हरे चारे का बड़ा विकल्प

बरसीमकी फसल

बरसीम(रजका) दुधारू पशुओं के लिए चारे का बेहतर विकल्प है। इससे हरा चारा मिलने के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। यह लवणीय क्षारीय भूमि को सुधारती है। प्रति हेक्टेयर में 900 से 1000 हजार क्विंटल चारे की उपज होती है। हल्की भूमि में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। अम्लीय भूमि बरसीम के लिए उपयुक्त नहीं होती। खेत में मिट्टी के ढेले नहीं होने चाहिए। अच्छी उपज के लिए बुआई के बाद पहली कटाई 50 से 55 दिन बाद शुरू की जा सकती है। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से गोबर या कम्पोस्ट डालना चाहिए।

ये हंै नई किस्म- उन्नतकिस्म वरदान, मस्कावी, पूसा जाइंट, बीएल-टेन, टी-750, 678, 724 एवं टी-560 अच्छी पैदावार दे सकती हैं। बढ़वार अच्छे जल निकासी, वायु संचार तथा अधिक जल धारण क्षमता वाली दोमट भूमि में होती है।

यह उपाय करें- कृषिविशेषज्ञ हरदेव बाजिया ने बताया कि क्यूनालफॉस डस्ट का 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें। फॉस्पोमिडॉन दवा 800 एमएल दवा को 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से दें।

खबरें और भी हैं...