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जिले के 5.82 लाख लोगों को सांस की बीमारी, एक साल में गई 13 की जान

5 वर्ष पहले
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यहहमारे सेहत से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर है। ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण के चलते हमारी सेहत बिगड़ रही है। जिले का हर पांचवां व्यक्ति सांस की बीमारी से पीड़ित है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती हैं कि साल 2015 में सांस से जुड़ी बीमारी के 5.82 लाख मरीज सामने आए। सबसे ज्यादा 10 साल के बच्चे बीमार हो रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि सांस से जुड़ी बीमारी खतरनाक भी होती जा रही है। इससे पिछले साल 13 लोगों की जान भी चली गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में सांस से जुड़ी बीमारी के मरीजों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। एक साल में इस बीमारी के मरीजों की संख्या में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। डॉक्टर बताते हैं कि लगातार बदले रहे मौसम की वजह से लोग जल्दी सांस से जुड़ी बीमारी में उलझ जाते हैं। उनकी रोगों से लड़ने की शक्ति खत्म हो रही है। जनवरी से दिसंबर 2015 में पांच लाख 82 हजार 623 मरीज थे। जबकि साल 2014 में विभाग की ओर से चार लाख 91 हजार 187 मरीज चिह्नित किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक से 10 साल के बच्चों में सांस की बीमारी ज्यादा बढ़ रही है।

बीमारी लोगों के जेब पर भी सीधा असर डाल रही है। भास्कर ने बाजार पर स्टडी की तो पता चला कि हर महीने सांस की बीमार से जुड़ी 10 करोड़ रुपए की दवा बिकती है। इसमें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर राज्य सरकार द्वारा भिजवाए जाने वाली दवा भी शामिल है। अकेले सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पैरासिटामोल और सिट्रेजीन की सवा करोड़ से ज्यादा टेबलेट खप जाती है।

स्वास्थ्यकेंद्रों की संख्या : जिलाअस्पताल सहित जिले में 30 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 99 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। निजी अस्पतालों की संख्या भी सैकड़ों में है।

कैसे बचें : सफाई पर विशेष ध्यान दें, फ्लू रोगी से बनाए रखें दूरी

एक्सपर्ट्सकी सलाह है कि तीव्र श्वसन संक्रमण से प्रभावित रोगी से संपर्क में नहीं आना चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थान पर नहीं जाए। अभिवादन के समय हाथ मिलाने से बचे। घर के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे। फ्लू पीड़ित रोगी से दूरी बनाए रखें।

491187 मरीज2014 में

582623मरीज2015 में

176599

11से 55 साल के मरीज

231976

1से 10 साल के मरीज

174000

55साल से ऊपर के मरीज

श्वसन तंत्र में संक्रमण के लिए सबसे ज्यादा प्रदूषण है। बदलता मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है। पर्यावरण में बदलाव आने के कारण सांस में तकलीफ की समस्या ज्यादा बढ़ी है। सीकर की आबादी घनी है। टूटी फूटी सड़कों के चलते उड़ती धूल और प्रदूषण बढ़ने के कारण रोगियों में इजाफा हुआ है। एक साल में 17 फीसदी रोगी बढ़ना चिंताजनक है। डॉ.सतीश कपूर, फिजिशियन

लोगों में तीव्र श्वसन संक्रमण की समस्या में घनी आबादी सबसे बड़ा कारण है। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग के चलते एनवायरमेंट में आए बदलाव ने लोगों की समस्या बढ़ाई है। उड़ती धूल और धुंआ सांस की बीमारी को बढ़ा रहे हैं। सीकर में यह तीनों ही समस्याएं तेजी से बढ़ी है। लिहाजा धीरे-धीरे इस प्रकार की बीमारी में इजाफा हुआ है। डॉ.सर्वेश जोशी, सचिव, जेएमए

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