चार साल में शहर पर सिर्फ 100 मिनट चर्चा
सुरेंद्र चौधरी/कुलदीप पारीक
सीकर | आजसुबह 11.15 बजे नगरपरिषद बोर्ड की बजट बैठक है। सवाल यह है कि क्या इस मीटिंग का भी वो मतलब निकलना है, जो पहले हुआ है? क्योंकि शहर के विकास से जुड़े इस मसले पर पहली बार दैनिक भास्कर ने बड़ी पड़ताल की। सच भी चौंकाने वाला सामने आया। चार साल में विशेष मीटिंग को छोड़ दिया जाए तो 12 आमसभा हुई, जिसमें बजट बैठक भी शामिल हैं। इस दौरान 555 पार्षदों को बात रखने का मौका मिला। लेकिन शहर के विकास की चर्चा का गणित देखंे तो इन मीटिंग में सिर्फ एक घंटे 40 मिनट ही विकास पर बात हो पाई। जबकि पार्षदों को हर साल 15 लाख रुपए मानदेय के अलावा प्रत्येक मीटिंग के लिए 500 रुपए भत्ता मिलता है।
नियमानुसार 60 दिन से निकाय की मीटिंग होनी चाहिए। इसी वजह से जनता को इंतजार रहता है कि मीटिंग में उनके विकास की बात होगी। हर बार यह इंतजार ही रह जाता है। क्योंकि मीटिंग में सिर्फ कर्मचारियों के भत्ते, सत्ता पक्ष के कुछ कामों पर सहमति बनती है। विपक्ष के लोग मजबूती से प्लानिंग के बजाय हो-हल्ला करके चले जाते हैं।
(हमने बोर्ड बैठक के एजेंडे की जानकारी जुटाकर उस समय को जोड़ा है, जिस पर खास तौर से शहर के विकास पर चर्चा हुई। किस पार्षद ने कितना बोला। इसके अलावा पार्षदों की बारी का गणित यह है कि हर मीटिंग में आने वाले पार्षदों की संख्या जोड़ी। इससे यह संख्या 570 होती है।)
शहरी सरकार के प्रमुख हैं। इनकी जिम्मेदारी बनती है विपक्ष और पक्ष के सभी सदस्यों को साथ लेकर मीटिंग में शहर के विकास कार्यों पर लंबी चर्चा हो।
तयबजट से पैसा कम खर्च होने की बड़ी वजह बजट की व्यवस्था नहीं हो पाना है। क्योंकि कई दफा जमीन बेचान सहित अन्य मदों से नगर परिषद को आय नहीं हो पाती है। छोटे-छोटे मुद्दों पर बेवजह बहस होने से मामला बिगड़ता है। पार्षद भी सदन में बड़े मुद्दे रखें। हमारी ओर से प्रयास किया जाएगा कि हर पार्षद की बात पर बैठक में चर्चा हो।
राज्यसरकार भाजपा की है। इसलिए यह कहकर बच नहीं सकते कि वे विपक्ष में हैं। पहले चर्चा करें या मीटिंग को लंबी चलाने के लिए दबाव बनाएं।
बोर्डबैठक से पहले विपक्ष को विश्वास में लिया जाए। विपक्ष द्वारा रखे गए मुद्दों पर चर्चा के लिए सत्ता पक्ष तैयार रहना चाहिए। प्रोसीडिंग में चर्चा होने के बावजूद कई जरुरी मुद्दों को एजेंडे में शामिल नहीं किया जाता है। इससे पार्षदों में आक्रोश बढ़ता है। प्रयास किया जाएगा कि शहर हित में मीटिंग ज्यादा देर चले और हर मुद्दे पर बेहतर चर्चा हो।
अटके हैं कई काम
मीटिंगके दौरान विकास कार्यों पर चर्चा नहीं होने का नतीजा यह है कि लोगों को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए सालासर रोड क्षेत्र में रास्ते की भूमि का डाइवर्जन नहीं होने से लोग परिषद पहुंचे। इस मामले को बोर्ड बैठक की प्रोसिडिंग में शामिल किया था, कार्रवाई नहीं हुई। राधाकिशनपुरा में जल भराव नवलगढ़ पुलिया के नीचे फाटक होने की परेशानी शामिल है।
हरबार वही एजेंडा
भास्करने 12 मीटिंग के मुद्दों और चर्चा को खंगाला तो सामने आया कि हर बार मामले रिपीट होते हैं। जैसे-सफाई, नाली मरम्मत और स्ट्रीट लाइट शामिल होती हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये किसी भी शहर की मूलभूत सुविधा का मामला है, जो करना ही होता है। शहर की जरूरत इनोवेशन पर विचार की होती है। जैसे- पार्किंग, मनोरंजन की सुविधा, वाई-फाई और ग्रीनरी।
कमाईके सिर्फ आंकड़े
पिछलीचार बजट मीटिंग के दौरान 527 करोड़ के प्रस्ताव पेश हुए। परिषद को 222 करोड़़ रुपए विभिन्न मदों से जुटाने थे, लेकिन 117 करोड़ रुपए ला पाए। सरकार से इस दौरान 121 करोड़ का अनुदान मिला। हालांकि सरकार से 149 करोड़ रुपए का अनुमान रखा गया था। इस दौरान कुल 371 करोड़ रुपए खर्च किए। बाकी रुपए का इंतजाम पहले खाते में पड़े रुपयों से किया गया।
कवायद : 10दिन जुटते हैं 200 कर्मचारी, इस दौरान परिषद के दूसरे काम हो जाते हैं प्रभावित
औरपरेशानी : लोगोंको अपने अटके काम कराने के लिए प्रदर्शन के लिए होना पड़ता है मजबूर
सुविधा : हरसाल पार्षदों को मिलती है 15 लाख रुपए सैलेरी, 500 रुपए हर मीटिंग का भत्ता
सवाल: विकासपर चर्चा नहीं करते, परिषद से जुड़े मसलों पर सहमति बनाकर खत्म कर देते हैं मीटिंग
इन मुद्दों पर होगी चर्चा | कचरानिस्तारण प्लांट के लिए रेट स्वीकृत करने, कर्मचारियों को भूखंड आवंटन, सफाई व्यवस्था को ठेके पर देने, माधव विहार योजना के भूखंड बेचान, भूमि अधिग्रहण करने।
2014-15 में 4.9 करोड़ रुपए।
सीसी-डामरसड़क का नेटवर्क बढ़ेगा।
16.50 करोड़ रुपए
60 लाख रुपए
पिछले वित्त वर्ष में यह योजना नहीं थी।
शहरके सभी वार्डों में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पिछले साल बजट था 80 लाख, खर्चे 60 लाख।
शहरके वंचित इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी।
2014-15 में यह योजना नहीं थी।
पेयजल,सीवरेज, सौंदर्यीकरण, एलईडी लाइट्स पर ध्यान देंगे।
27.50 करोड़ रुपए
नाली निर्माण
4करोड़
सफाई
3.50करोड़
सुविधाघर
2.15करोड़
स्वच्छभारत
2करोड़
सड़कमरम्मत
2करोड़
नालीमरम्मत
1.5करोड़
पार्क
1.7करोड़
(सभीआंकड़े नगर परिषद से प्राप्त)
भास्कर ने 12 मीटिंग की पड़ताल की। एक उदाहरण है 26 जून 2014 की बैठक। यह मीटिंग सिर्फ चार मिनट चली। बजट बैठक का भी ऐसा ही हश्र होता है। 19 फरवरी 2014 की मीटिंग चार मिनट चल सकी। इसके बाद ये स्थगित हो गई, जिसे दुबारा बुलानी पड़ी। अन्य 10 मीटिंग भी औसत 45 मिनट ही चली, जिसमें विकास के एजेंडे पर औसत सिर्फ 9 मिनट बात ही हो पाई।
{बजटमीटिंग की तैयारी के लिए 10 दिन करीब 126 कर्मचारी लगते हैं।
{इन मीटिंग के लिए शहर की 3.50 लाख की आबादी इंतजार करती है कि कुछ नया मिलेगा।
{हर पार्षद दो घंटे घर से आने-जाने में लगाता है, चर्चा होती है कुछ मिनट की।
नवलगढ़ रोड पर बनेगा फुट ओवरब्रिज
2014-15 में इस मद में बजट नहीं था।
03 करोड़
06
करोड़ रुपए
स्मार्ट िसटी
वेतन भत्ता
सफाई के िलए