सीकर. शहरी सरकार अपना दूसरा बजट पेश करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। शनिवार को होनी वाली नगर परिषद बोर्ड की साधारण सभा में 192 करोड़ रुपए का बजट पेश किया जाएगा। जो पिछले बजट की तुलना 31 करोड़ रुपए ज्यादा है। सबसे ज्यादा 27 करोड 50 लाख रुपए अमृत योजना के प्रोजेक्ट पर खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा सड़क नाली निर्माण व मरम्मत पर करीब 24 करोड़ रुपए खर्चे की व्यवस्था की गई है। मीटिंग में आम जनता के लिए स्मार्ट वार्ड योजना लागू करने और कर्मचारियों को आवास के लिए भूखंड आवंटन पर फैसला होगा। इसके अलावा शहरी विकास सहित एजेंडे के अन्य बिंदुओं पर चर्चा होगी। माधव विहार योजना में दो बार जमीन बेचने में नाकाम रही परिषद एक बार फिर भूखंड नीलामी का प्रस्ताव बोर्ड में रखने जा रही है।
शनिवार को पेश होने वाले बजट के हर पहलू से रूबरू कराती दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट...
बजट की यह है बड़ी कमी: स्मार्ट सिटी की जरुरतों पर न पैसों का प्रबंध न खर्च किए
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कुछ सुविधा जरुरी है। इनमें बेहतर पार्किंग, पार्कों मे खेल सामग्री, सीसीटीवी, वाई-फाई आदि की सुविधा होनी चाहिए। लेकिन नगर परिषद द्वारा न तो पिछले बजट में इन व्यवस्थाओं पर कोई पैसा खर्च किया गया न ही आगामी बजट में इनके लिए पैसों की व्यवस्था की गई।
नगर परिषद सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए ऑटो टीपर व डंपर खरीद पर 65 लाख रुपए खर्च करेगी। इसके अलावा ऑन लाइन सिस्टम डवलप करने के लिए अन्य शाखाओं में भी कंप्यूटर लगाए जाएंगे। इस पर प्रावधान के तहत 50 लाख रुपए खर्च होंगे।
सौर ऊर्जा से रोशन होगा परिषद का नया भवन : नगर परिषद का नया भवन सौर उर्जा से रोशन होगा। सौलर पैनल के लिए दो करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। वहीं फर्नीचर पर अतिरिक्त दो करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस साल के आखिरी तक परिषद स्टाफ नए भवन में शिफ्ट हो जाएगा।
सुरक्षा के लिए सीसीटीवी : कुछ नहीं
आम आदमी और व्यापारी सुरक्षा तंत्र मजबूत करने में जुटा हुआ है। लेकिन परिषद ने सीसीटीवी के लिए बजट नहीं रखा। जबकि विधायक जलधारी 20 लाख की मंजूरी दे चुके हैं।
वाई फाई की सुविधा : कुछ नहीं
जबकि बड़े शहरों में चुनिंदा स्थानों पर फ्री वाई फाई की सुविधा दी जा रही है। ताकि आम आदमी तकनीक के साथ चल सके। क्योंकि लगभग 80 फीसदी युवा एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पार्किंग पर खर्च का प्रबंध : कुछ नहीं
पार्किंग व्यवस्था डवलप करने के लिए बजट की व्यवस्था नहीं की गई। जबकि शहर में किसी भी जगह ठेका पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। वाहन चालक मनमर्जी से आम रास्तों पर गाड़ी पार्क कर रहे हैं।
खेल सामग्री पर खर्च व्यवस्था : कुछ नहीं
शहर में करीब डेढ़ दर्जन पार्क है। इनमें से करीब एक दर्जन डवलप है। लेकिन बच्चों के लिए खेल सामग्री नहीं हैं। बजट में भी इसकी व्यवस्था नहीं की।
बजट एनालिसिस : आय का लक्ष्य नहीं
बजट में कई ऐसी मद हैं, जिनमें आय और खर्च का कोई प्रबंध नहीं किया है। इनमें से कुछ ऐसे मद हैं, जो परिषद की आय बढ़ा सकते हैं। हाथ ठेले, अतिक्रमण शुल्क से किसी तरह की आय का लक्ष्य नहीं रखा गया।
अतिक्रमण पर जुर्माने से आय : कुछ नहीं
हर मुख्य सड़क पर अतिक्रमण है। नगर परिषद आए दिन अस्थाई अतिक्रमण करने वालों से जुर्माना वसूल कर रही है। लेकिन टारगेट नहीं रखा गया।
बजट की यह है बड़ी कमी: स्मार्ट सिटी की जरुरतों पर न पैसों का प्रबंध न खर्च किए
बैठक से पहले सभापति जीवण खां ने नेता प्रतिपक्ष अशोक चौधरी व विपक्षी पार्षदों से चर्चा की सूत्रों के अनुसार विपक्षी पार्षदों से चर्चा के पीछे बड़ा उद्देश्य यह है कि आम सभा सुचारू रूप चले और शहर के मुद्दों पर चर्चा हो। अक्सर बोर्ड बैठक हंगामे की भेंट चढ़ जाती है। इस बार सभापति ने एक नई पहल की है। नेता प्रतिपक्ष अशोक चौधरी ने बताया कि सभापति ने सभी मांगों पर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। विपक्ष भी चाहता है कि शहर हित में बोर्ड बैठक सुचारू रूप से चले और हर मुद्दे पर चर्चा हो।
पिछले बजट का रिव्यू
161 करोड़ तय किए, खर्च महज 77 करोड़
शहरी सरकार विकास पर पैसे खर्च करने से सालभर हाथ खींचती रही। टेंडर होने के बावजूद कई काम शुरू नहीं हो पाए। 161 करोड़ रुपए के बजट में से महज 77 लाख रुपए खर्च हो सके। नए बजट से पहले भास्कर ने पिछले बजट का रिव्यू किया। इसमें सड़क-नाली निर्माण व मरम्मत पर 7.9 करोड़़ रुपए खर्च किए हैं। जबकि 34 करोड़ का प्रावधान किया था। इसी तरह सुविधा घर पर 1.3 करोड़ में से 70 लाख तथा पार्कों पर दो करोड़ में से एक करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।
शहरी सरकार को विधायक व सांसद निधि से कोई पैसा नहीं मिला। परिषद ने पैसे भी बचाए। लेखन सामग्री व कंप्यूटर इंक पर दो लाख, जेसीबी किराए में 3.90 लाख, पेट्रोल-डीजल खपत पर चार लाख तथा सफाई व्यवस्था में 25 लाख रुपए बचाए। वहीं परिषद ने कृषि भूमि रुपांतरण व पट्ट पर सवा करोड़़ के मुकाबले चार करोड़ का राजस्व जुटाया। इसी तरह लीज प्रीमियम पर 65 लाख की बजाय एक करोड 60 लाख का राजस्व मिला।