सीकर. एटीएम में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही है। इसके बावजूद बैंक, एजेंसी और पुलिस एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। एटीएम में रखे लाखों रुपए की सुरक्षा की जिम्मेदारी कोई भी लेने का तैयार नहीं है। एटीएम सुरक्षा की बात आरबीआई की बैठक में भी उठ चुकी है। महज सात दिन में सीकर जिले में एटीएम में चोरी और तोडफ़ोड़ की तीन बड़ी घटनाएं हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अपने हाथ खींच रहे हैं। इसी बीच एक दूसरी तस्वीर यह भी कि प्राइवेट बैंकों के एटीएम पर 24 घंटे गार्ड तैनात रहते हैं। लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम पर यह व्यवस्था नहीं है। जबकि इनके पास प्राइवेट से ज्यादा संसाधन और सुविधाएं रहती हैं।
एजेंसियों के जिम्मे है व्यवस्था
ज्यादातर एटीएम एजेंसी के जरिए संचालित किए जा रहे हैं। इन एटीएम पर सुरक्षा, कैश मैनेजमेंट सहित तमाम व्यवस्थाएं एजेंसी के जिम्मे रहती है। एसबीआई बैंक के मुख्य प्रबंधक बीसी जैन के अनुसार एजेंसी द्वारा संचालित किए जाने वाले एटीएम में बैंक सिर्फ डिमांड के अनुसार कैश मुहैया करवाते हैं। इसके अलावा तमाम जिम्मेदारी एजेंसी की रहती है। एसबीबीजे के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके सिंगारिया के अनुसार बैंक ऑन व ऑन लाइन एटीएम के संचालन की व्यवस्था खुद देखते हैं। संवेदनशील स्थानों वाले एटीएम पर गार्ड लगाए जाते हैं। हाल ही में मुख्यालय को इस संबंध में लिखा गया है। सीकर जिले में एसबीबीजे के किसी भी एटीएम पर गार्ड नहीं है।
बैंक को ही सुधारनी होगी व्यवस्था
पहले बैंक अपनी व्यवस्थाएं सुधारे। उसके बाद कुछ होता है तो हमारी जिम्मेदारी है। बैंक आरबीआई की गाइड लाइन का फॉलो करे। अगर सुरक्षा व्यवस्था नहीं कर सकते तो रात के समय एटीएम बंद रखें। धोद रोड स्थित एमटीएम में चोरी की घटना के बाद मंगलवार को एसपी ने बैंक अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में एसपी हैदर अली जैदी ने कहा कि बैंक एटीएम को एजेंसी के भरोसे छोडऩे की बजाय खुद मॉनिटरिंग करे। नया एटीएम लगाने से पहले पुलिस से वेरिफिकेशन करवाएं। सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग एटीएम के अलावा दूसरी जगह पर भी रखें। ताकि चोरी की वारदात को अंजाम देने वालों की पहचान की जा सके। इसके अलावा अलार्म सिस्टम लगाए। ये तमाम व्यवस्थाएं आरबीआई की गाइड लाइन में भी शामिल है।
अलग-अलग बंटा है काम
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी एटीएम लगाने वाली कंपनी के अधीन होती है। एटीएम को संचालित करने में लगभग 10 एजेंसियां काम करती है। सीएमएस (कैश मैनेजमेंट सिस्टम) एजेंसी के ब्रांच मैनेजर राजकुमार के अनुसार सुरक्षा, कैश मैनेजमेंट, सार संभाल, साफ सफाई, नेटवर्क सहित तमाम व्यवस्थाएं अलग अलग एंजेसियों के पास होती है। ये सभी एजेंसियों एटीएम लगाने वाली कंपनी के अधीन रहती है। एटीएम लगाने वाली कंपनियां सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस करवाती है। कैश मैनेजमेंट रखने वाली कंपनी के पास एटीएम लगाने वाली कंपनी से बैलेंस का मैसेज आता है। इसके आधार पर ही बैंक से पैसा उठाकर एटीएम में डाला जाता है। एग्रीमेंट टॉप लेवल पर होता है। ऐसे में किस जगह पर कौन सी एजेंसी काम कर रही है। इसकी जानकारी नहीं हो पाती है।
शहर में धोद रोड से एसबीआई का 22 लाख से भरा एटीएम पार करने के मामले में बुधवार को पुलिस अधिकारियों ने दुबारा घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने उस टीम को बुलाया जिन्होंने एटीएम वहां पर फिट किया था। उन कर्मचारियों से मौके पर ही पूछताछ की गई। बुधवार दोपहर सीओ सिटी चंद्रेश गुप्ता, शहर कोतवाल नरेश कुमार व महिला थाना एसएचओ अशोक चौधरी दुबारा जांच के लिए मौके पर पहुंचे। यहां पर कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की गई। जिस तरह से एटीएम लगाया गया था वह आज भी पुलिस संदेह के घेरे में मान रही है। कई जगह से मिले सीसीटीवी फुटेज व मोबाइल लोकेशन खंगाली जा रही है। एटीएम का फाउंडेशन लगा हुआ था। यह भी पुलिस एक्सपर्ट के मार्फत से पता करवा रही है।
सुरक्षा की दो तस्वीर : निजी एटीएम पर रहते हैं 24 घंटे गार्ड राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम का कोई रखवाला नहीं
हर दिन एक लाख का ट्रांजेक्शन, डाल दिए 13 लाख : एम्फेसिस कंपनी की ओर से धोद रोड पर संचालित किए जा रहे एटीएम में हर दिन एक लाख रुपए का ट्रांजेक्शन होता है। नौ लाख रुपए बैलेंस होने के बावजूद एटीएम में 13 लाख रुपए और क्यों डाले गए।
हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज की तैयारी : एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आरबीआई अधिकारियों ने बैठक में एटीएम की सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रखने की बात रखी। बैंकर्स ने इस खर्च को वहन करने के लिए हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज वसूलने का प्रस्ताव रख दिया।
गार्ड का नहीं होता पुलिस वेरिफिकेशन : शहर में एटीएम पर गार्ड लगाने के लिए न तो बैंक व संबंधित एजेंसी गार्ड का पुलिस वेरिफिकेशन करवाती है न ही पुलिस इसका प्रयास करती है। एटीएम पर एजेंसियां आए दिन एटीएम पर गार्ड बदलती रही है। गंभीर तो यह है कि बैंक या एटीएम लगाने वाली एजेंसी भी एटीएम लगाने से पहले संबंधित जगह का पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं करवाती है।
20 करोड़ की सुरक्षा के लिए कोई गार्ड नहीं : जिलेभर में 133 एटीएम है। इनमें से 80 एटीएम में करीब 20 करोड़ रुपए रहते हैं लेकिन इन एटीएम में गार्ड नहीं है। शेष पेजत्न14
औसतन 25 लाख रुपए की केपिसिटी के हिसाब से एटीएम में 33 करोड़ रुपए से ज्यादा हर दिन भरे जाते हैं। इनमें से करीब 80 एटीएम ऐसे हैं जहां कोई गार्ड नहीं है। इनमें करीब 20 करोड़ रहते हैं।
सात दिन में तीन घटनाएं
सीकर : धोद रोड से शुक्रवार रात को चोर 22 लाख रुपए से भरा एसबीआई का एटीएम उठा ले गए।
रींगस : मंगलवार रात को चोर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से पैसा निकासी वाले हिस्से को रोड से तोडकर 12900 रुपए निकाल ले गए।
रींगस : मंगलवार रात को ही चोरों ने एसबीआई के एटीएम का उखडऩे की कोशिश की।
यह भी जाने
ऑन व ऑफ साइड एटीएम : ऐसे एटीएम जिन्हें बैंक खुद संचालित करता है। इनकी मेंटिनेंस, सुरक्षा केश मैनेजमेंट, उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटान सहित तमाम जिम्मेदारी बैंक की रहती है। बैंक बाउंड्री में लगने वाले एटीएम ऑन साइड और बैंक से दूर लगाए जाने वाले ऑफ साइड कहा जाता है।
ब्राउंड लेवल एटीएम : इन एटीएम की तमाम व्यवस्था निजी कंपनी के हाथ होती है लेकिन ब्रांड नेम बैंक का होता है। एटीएम लगाने, केश मैनेजमेंट, सुरक्षा, मेंटिनेंस, इंश्योरेंस सहित तमाम कामकाज एजेंसी के जरिए किए जाते हैं। सीकर शहर में डिबोल्ड, एनसीआर, टाटा, एजीएस, एम्फेसिस सहित कई कंपनियों ने एटीएम लगा रखे हैं।
व्हाइट लेवल एटीएम : इन एटीएम में व्यवस्थाओं के साथ ब्रांड नेम भी कंपनी का होता है। हाल ही में आरबीआई की स्वीकृति के बाद टाटा कंपनी ने महाराष्ट्र में व्हाइट लेवल एटीएम लगाए हैं। इनकी पूरी व्यवस्था निजी कंपनी के जिम्मे रहती है।