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नगर परिषद नेता प्रतिपक्ष के लिए भाजपा पार्षद आजमा रहे दांवपेच

7 वर्ष पहले
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सीकर। नई शहरी सरकार बनने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा नेताओं में नए सिरे से भागदौड़ शुरू हो गई। भाजपा में पार्षद नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए अपने-अपने दांव लगा रहे हैं। वहीं कांग्रेसी पार्षद परिषद में गठित होने वाली छह से आठ समितियों में जगह पाना चाहते हैं। नवनिर्वाचित सभापति पर समितियां गठित करने और इसमें बड़े नेताओं की सिफारिश वालों को शामिल करने का दबाव भी रहेगा। दैनिक भास्कर विशेष रिपोर्ट के जरिए पार्षदों को उन समितियों के अधिकारों से रूबरू करवा रहा है। जिन समितियों में उनको अध्यक्ष और सदस्य बनने का मौका मिल सकता है।
दोनों पार्टियों में जोर-शोर से जुटे हैं पार्षद
नेता प्रतिपक्ष के लिए इन नामों पर चर्चा

नेता प्रतिपक्ष के लिए भाजपा पार्षदों में अंदरूनी तौर पर जोड़ तोड़ चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में विनोद सेठी, अशोक चौधरी, सुमित्रा सैनी, विश्वनाथ सैनी के नामों की ज्यादा चर्चा है। इधर, नीमकाथाना नगरपालिका में नेता प्रतिपक्ष के लिए महेंद्र गोयल, जेपी लोढ़ा, छगन गुर्जर का नाम चल रहा है।
समिति सदस्यों में इनके नाम प्रमुख

कांग्रेस में सभापति की दौड़ में शामिल रहे वरिष्ठ नेताओं की प्रमुख समितियों में ताजपोशी हो सकती है। इनमें मुश्ताक तंवर, सुबै दौलत पंवार, सज्जाउद्दीन चौहान, आबीदा बानो, शाकीर भारती, मुबारक रंगरेज, सुलतान प्रमुख हैं। इसके अलावा सुनील शर्मा, शारदा दानोदिया, नीतू तिवाड़ी, रविकांत तिवाड़ी शामिल हो सकते हैं।
समिति में होंगे विपक्षी सदस्य

दो समितियां सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनमें कार्यपालक और वित्त समिति है। कार्यपालक समिति में दो महिलाओं सहित आठ पार्षद सदस्य होते हैं। इनमें पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विपक्ष नेता को सदस्य बनाया जाता है। इसके अलावा वित्त समिति में पांच से आठ सदस्य हो सकते हैं।
  • कार्यपालक समिति के अधिकार : सभी समितियों की मॉनिटरिंग, प्रशासनिक नियंत्रण एवं निर्णय, कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई। इसके अलावा तमाम समितियों की कार्रवाई रिपोर्ट भी इसी समिति को सौंपी जाएगी।
  • वित्त समिति के अधिकार : समिति परिषद के बायलाज में तय सीमा तक वित्तीय स्वीकृति दे सकती है। पूर्व में समिति की सीमा 10 लाख रुपए तय थी। बायलॉज के अभाव में समिति बोर्ड के समान 10 से 50 लाख रुपए तक की स्वीकृति जारी कर सकती है। इसके अलावा अन्य समितियों के वित्त संबंधी प्रस्तावों पर भी निर्णय करती है।
  • स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति के अधिकार : स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े कामों के बारे में प्रस्ताव लेने और योजना बनाने के काम कर सकेगी। किसी तरह के उपकरण या सामग्री खरीद के लिए प्रस्ताव वित्त समिति को भेजे जाएंगे।
  • भूमि विक्रय समिति के अधिकार : नगर परिषद क्षेत्र में नई आवासीय योजना बनाना। भूमि नीलामी, खाता भूमि विक्रय, पट्टे जारी करने का निर्णय ले सकती है।
  • भवन अनुज्ञा और सकर्म समिति के अधिकार : भवन निर्माण संबंधी स्वीकृति देने के अलावा, बिना स्वीकृति निर्माण पर मिलने वाली शिकायतों की जांच करवाकर कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
  • गंदी बस्ती सुधार समिति के अधिकार : समिति का सीधा फोकस पिछड़ी बस्तियों पर होता है। इन बस्तियों में साफ सफाई के अलावा लोगों के जीवन स्तर में बदलाव लाने के लिए योजना बनाकर उन्हें लागू करवाने के निर्णय ले सकती है।
  • नियम उप विधियां समिति के अधिकार : परिषद के लिए बायलॉज बनाने, नए नियम-उप नियमों और उनकी क्रियान्विति करवाना। नियमों की पालना के लिए मॉनिटरिंग।