सीकर. एकीकरण के बाद भी सरकारी स्कूलों में सुधार होता नजर नहीं आ रहा। संबलन अभियान के पहले दिन सोमवार को कलेक्टर एसएस सोहता बच्चों का लर्निंग टेस्ट लेने के बाद उस समय अनहैप्पी हो गए जब आठवीं कक्षा के छात्र हैप्पी का विलोम शब्द नहीं बता सके।
राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल रामू का बास में दो स्कूल मर्ज होने के बाद भी छात्र संख्या सिर्फ 44 ही हुई है। इनमें भी उपस्थिति 37 बच्चों की ही थी। जबकि टीचर्स 11 हैं। कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए शिक्षकों से कहा कि दो स्कूल मर्ज होने के बाद भी केवल 44 बच्चों का नामांकन भविष्य की असल तस्वीर है। पढ़ाई नहीं होने के कारण पेरेंट्स अब सरकारी स्कूलों में बच्चों को भेजना ही पसंद नहीं करते।
सरकारी में वे ही अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेज रहे हैं, जो प्राइवेट में नहीं पढ़ा सकते। कलेक्टर ने शिक्षकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सुधर जाओ वरना बोरिया-बिस्तर बांधने की तैयारी कर लो। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो मैं नीमकाथाना भेज देता हूं। निरीक्षण के दौरान सर्वशिक्षा अभियान के एपीसी कैलाशचंद अग्रवाल भी मौजूद थे।
आज से 160 अफसर जांचेंगे 320 स्कूल :
संबलन अभियान मंगलवार से जिलेभर के स्कूलों में चलाया जाएगा। मंगलवार को 160 अफसर 320 स्कूलों में बच्चों का लर्निंग लेवल जांचेंगे।
इसलिए तल्ख हुए कलेक्टर
संबलन अभियान में कलेक्टर राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल रामू का बास पहुंचे तो हैरान करने वाली स्थिति मिली। दो स्कूल मर्ज होने के बाद भी 11 टीचर पर सिर्फ 44 बच्चे थे। जबकि नामांकन बढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की भी है।
कलेक्टर के टेस्ट में फेल हो गए बच्चे
संबलन अभियान में दो महीने की पढ़ाई में बच्चों ने क्या सीखा- यह जानने के लिए अफसरों को लर्निंग लेवल की जांच करनी है। कलेक्टर की जांच में इसकी पोल भी खुल गई। कलेक्टर एसएस सोहता ने आठवीं क्लास के एक बच्चे से प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम पूछा तो जवाब मिला-नरेंद्र मोदी। बाद में जब बच्चे से देश के प्रधानमंत्री का नाम पूछा तो वसुंधराराजे बताया। हालांकि बाद में शिक्षकों के कहने पर उसने मुख्यमंत्री का नाम भी सही बताया।
हैप्पी का विलोम शब्द नहीं बता सके
8वीं के बच्चों से जब कलेक्टर ने हैप्पी का विलोम शब्द पूछा तो बच्चे एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
भारत में राज्यों की संख्या पूछी तो बच्चों ने कहा-33 हैं
सातवीं क्लास के बच्चों से कलेक्टर ने भारत में राज्यों की संख्या पूछी तो 33 बताई।
टीचर हिंदी पढ़ा रहे थे, कलेक्टर आए तो चले गए
छठीं क्लास में एक शिक्षक हिंदी पढ़ा रहे थे। जैसे ही कलेक्टर पहुंचे और हिंदी की चर्चा छेड़ी तो टीचर ने अन्य शिक्षक का पीरियड बताते हुए किताब रख दी और चले गए। इस पर कलेक्टर ने शिक्षक को फटकार लगाई।
हैड मास्टर से पूछा-2003 से यहीं पर हैं तो क्या किया
कलेक्टर ने एचएम हुकमसिंह से पूछा कि वे स्कूल में कब से हैं। उन्होंने बताया कि वे 2003 से इसी स्कूल में कार्यरत हैं। इस पर कलेक्टर ने कहा कि इतने सालों में भी नामांकन नहीं बढ़ा सके।
गणित के सवालों के जवाब सही दिए :
पांचवीं क्लास में गणित के सवालों के जवाब में बच्चे जरूर खरे उतरे। इस पर कलेक्टर ने बच्चों
की तारीफ की।
ड्रम में मिट्टी, जवाब-दूसरे स्कूल से आया है
पोषाहार स्टॉक में भी गड़बड़ी मिली। कलेक्टर को गेहूं के एक ड्रम में मिट्टी भी मिली। हालांकि शिक्षकों ने अपने बचाव में जवाब दिया कि ड्रम दूसरे स्कूल से आया है। इसे जल्द ही साफ करा दिया जाएगा। कलेक्टर ने इस दौरान पोषाहार भी चखा।
आगे की स्लाइड्स में कलेक्टर हैं क्लास लेते और भोजन की गुणवत्ता को जांचते हुए-