सीकर। गोविंद नगर आवासीय योजना के फैसले के इंतजार में यूआईटी दो नई कॉलोनियों की फाइल भी आगे नहीं बढ़ा रही है। यूआईटी हिम्मत नहीं जुटा पा रही है कि जब तक गोविंद नगर में प्लॉट आवंटित नहीं हो जाते तब तक लोग अगली योजनाओं पर कैसे विश्वास करेंगे? आवेदन के साथ मिले 23 करोड़ में से 15 करोड़ रुपए की यूआईडी ने एफडी करा दी। जबकि डेढ़ करोड़ रुपए लोग वापस ले चुके हैं। नई कॉलोनी के लिए चंदपुरा व जगमालपुरा में प्रशासन ने जमीन भी अलॉट कर दी थी।
यूआईटी ने गठन के बाद पिछले साल पहली आवासीय योजना जारी की। 12 हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया। लेकिन ग्रामीणों ने योजना पर स्टे ले लिया। अप्रैल 2014 से यह मामला कोर्ट में लंबित है। इसी दौरान यूआईटी ने चंदपुरा व जगमालपुरा में भी दो आवासीय योजनाएं प्रस्तावित कर दीं। खामियों को दुरुस्त करते हुए फाइल जयपुर भेज दी गई। लेकिन फॉलोअप नहीं किया जा रहा है।
आवासीय योजना में आवेदन करने वाले 850 लोग अब तक वापस ले चुके हैं अपना पैसा
नई कॉलोनियों का प्लान : 29 एकड़ में चंदपुरा और 55 एकड़ में जगमालपुरा कॉलोनी डवलप करने के लिए स्कीम तैयार की गई है। इसमें आवासीय प्लॉट, ग्रुप हाउसिंग, कॉमर्शियल प्लॉट के अलावा पानी की टंकी, ट्रांसफार्मर, पार्क की सुविधा के लिए जगह आरक्षित रखी गई। जगमालपुरा कॉलोनी में सामान्य आवास के 354 प्लॉट, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 61 प्लॉट, एलआईजी के 51 प्लॉट, नौ पार्क, 206 रिटेल शॉप, 36 कामर्शियल शॉप, 5 कामर्शियल प्लॉट और दो ग्रुप हाउसिंग रखे गए हैं। चंदपुरा योजना में सामान्य आवासीय 200 प्लॉट, ईडब्ल्यूएस व एलआईजी श्रेणी के 75 प्लॉट प्रस्तावित किए गए हैं।
यूआईटी का सफर : शहर में यूआईटी का संचालन 2013 अक्टूबर में शुरू था। चार महीने बाद भैंरुपुरा में गोविंद नगर के नाम से आवासीय योजना बनाई। इसके लिए फरवरी में आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई। लोगों ने काफी उत्साह दिखाया और 254 प्लॉट के लिए 12 हजार से ज्यादा आवेदन किए। इन आवेदनों से ही यूआईटी के खाते में 23 करोड़ रुपए आ गए।
'जमा हुए रुपए में 15 करोड़ की एफडी करवाई है। इससे संस्था को ब्याज मिलेगा। सुनवाई की अर्जी भी लगाई जा रही है ताकि फैसला होने पर काम आगे बढ़ाया जा सके।' हरिसिंह, एएओ यूआईटी
यूं बढ़ता गया फैसले का इंतजार
गोविंद नगर आवासीय योजना का केस 4 अप्रैल 2014 को कोर्ट में रजिस्टर हुआ। 15 अप्रैल को पहली सुनवाई हुई। इस साल जनवरी तक सात बार बहस हुई। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें दी। 19 जनवरी और पांच फरवरी को सुनवाई नहीं हो सकी।
आगे क्या : 30 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई
मामले में अब 30 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। जिस जमीन पर कॉलोनी काटी जानी है भैंरुपुरा के लोगों ने उसे गोचर भूमि बताकर हाईकोर्ट में दावा कर रखा है। यूआईटी जल्दी सुनवाई के लिए अर्जी पेश कर रही है।
पांच फीसदी कटौती के बाद दे रहे हैं पैसे
मामला कोर्ट में जाने के बाद से यूआईटी इस योजना पर कोई काम नहीं कर पा रही है। एक साल के इंतजार के बाद लोगों ने भी आस छोड़ दी और पैसे वापस लेने की कवायद करने लगे। अब तक 850 लोग यूआईटी से करीब डेढ़ करोड़ रुपए वापस ले चुके हैं। आवेदन के साथ जमा पैसा पांच फीसदी कटौती के बाद दिया जा रहा है।