सीकर। स्वाइन फ्लू से जिले में जनवरी से अब तक आठ मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 16 पॉजीटिव रोगी मिले हैं। इन सबके बीच स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल स्वाइन फ्लू संदिग्धों की जांच रिपोर्ट पांच से छह दिन में आ रही है। ताजा उदाहरण नीमकाथाना के मरीज से जुड़ा है। उसकी मौत के पांच दिन बाद रिपोर्ट आई।
एक और चिंता की बात यह है कि इस सीजन में जिले में स्वाइन फ्लू के वैक्सीन उपलब्ध नहीं करवाए हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस वैक्सीन से इंफेक्शन नहीं फैलता है। यह फ्लू के 80 प्रतिशत मामलों में कारगर है। वैक्सीन शरीर में एच1एन1 वायरस को रोकती है। बताया जा रहा है कि वैक्सीन प्रदेश में सिर्फ स्टाफ के लिए ही सप्लाई हो रहा है।
लापरवाही की हद बताते दो उदाहरण
1) नीमकाथाना के श्योनारायण पुत्र बीरबल की सात फरवरी को मौत हो गई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट बुधवार को आई। रिपोर्ट में पॉजीटिव बताया गया है।
2) एसके अस्पताल से आठ फरवरी को मंजू के सैंपल लेकर जांच के लिए जयपुर भेजे। चार दिन बाद आई रिपोर्ट में पॉजीटिव बताया। जबकि अस्पताल से पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया।
सीएमएचओ-विभाग की वेबसाइट के आंकड़ों में अंतर | सीएमएचओ डॉ रतन मोदी ने बताया कि जिले में अभी तक 14 पॉजीटिव आ चुके हैं। जबकि विभाग की वेबसाइट पर सीकर जिले में 16 पॉजीटिव बताए जा रहे हैं। मोदी ने बताया कि अभी तक 240 लोगों को टेमी फ्लू की दवा दी जा चुकी है। बी कैटेगरी के 232 और सी कैटेगरी के 8 मरीज आए हैं।