पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Election, Politics, Rajasthan Government, Shekhawati

चुनावी ‘गर्मी’ में विधायक लगवा सकेंगे 100 हैंडपंप

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सीकर.चुनावी गर्मी में सरकार जनता की प्यास बुझाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। राज्य सरकार ने हर विधायक को इस गर्मी में 100 हैंडपंप मंजूर करने का अधिकार दिया है। विधायक की मंजूरी मिलते ही जलदाय विभाग को 20 दिन में हैंडपंप लगवाना होगा। विभाग का कहना है कि मई-जून में बढ़ने वाले पेयजल संकट के बीच यह आदेश मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक पेयजल संकट वाले गांव-ढाणी के लोगों को अपने विधायक से जलदाय विभाग को लिखित में पत्र दिलवाना होगा। इसी के आधार पर मंजूरी मिलेगी। इसके बाद 20 दिन के भीतर उस इलाके में हैंडपंप लगा दिया जाएगा। एक मई से योजना लागू हो चुकी है। इसमें शर्त यह है कि हैंडपंप से पेयजल की व्यवस्था 20 घरों की आबादी वाली बस्ती में भी की जाएगी। आधा किलोमीटर तक पेयजल स्रोत नहीं होना चाहिए। यदि इलाका आबादी क्षेत्र में है और पहले से हैंडपंप लगे हुए हैं तो 200 मीटर की दूरी और किल्लत वाले क्षेत्र में अधिकतम 100 घरों की आबादी होनी चाहिए। 15 से 20 हैंडपंप पहले से लगे हुए हैं तो उनमें पानी की उपलब्धता को आधार माना जाएगा। इधर, डार्क जोन की समस्या छह महीने पहले खत्म हो चुकी है। क्योंकि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी बनाई हुई है। यह कमेटी डार्क जोन में हैंडपंप की मंजूरी देती है। खंडेला, दांतारामगढ़, नीमकाथाना व श्रीमाधोपुर डार्क जोन में हैं।
जेब से खर्चा फिर भी ठीक नहीं होते
नीमकाथाना के मावंडा कला इलाके के मोहल्ला सतीमाता में ग्रामीणों को हैंडपंप व ट्यूबवैल ठीक कराने के लिए जेब से खर्चा करना पड़ता है। बावजूद एक पखवाड़े तक ठीक नहीं किया जाता। राधेश्याम वर्मा ने बताया कि हैंडपंप व ट्यूबवैल खराब होता हैं तो स्थानीय कर्मचारी को सूचित किया जाता है। बाद में नीमकाथाना से विभाग से स्वीकृति लेनी पड़ती है। ठीक करने के ऑर्डर होते है तो ग्रामीण ही बोरिंग से पाइप निकालते हैं और आने जाने का किराया चंदा से इकट्ठा करते है। एक माह में हैंडपंप दो बार खराब होता है और हर बार 600 रुपए खर्च होता हैं। फिलहाल हैंडपंप खराब हैं। पिछले दिनों ट्यूबवैल को ठीक कराने के लिए ग्रामीणों ने 3100 रुपए चंदा किया था।
15 महीने से नहीं मिला कनेक्शन
खंडेला इलाके के राजकीय संस्कृत उच्च प्राथमिक विद्यालय में 15 माह बाद भी सिंगल फेस ट्यूबवैल को बिजली कनेक्शन नहीं किया गया है। प्रधानाध्यापक मुकेश शर्मा का कहना है कि इस संबंध में जलदाय विभाग समेत उच्चस्तर पर कई बार लिखित में शिकायत कर बिजली कनेक्शन करवाने की मांग की गई है।
12 माह से ठीक नहीं हुआ ट्यूबवैल
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धर्मपुरा में 12 माह पहले लगाया गया सिंगल फेस ट्यूबवैल तकनीकी खराबी की वजह से बंद पड़ा है। ग्रामीण सत्यप्रकाश ने बताया कि समस्या के बारे में अनेक बार जलदाय विभाग को अवगत करवाया गया है ध्यान नहीं दिया जा रहा।
अभी डेढ़ महीने तक मंजूरी ही नहीं मिलती है
हैंडपंप लगाने की सामान्य प्रक्रिया यह है कि सबसे पहले ग्राम सभा से प्रस्ताव पंचायत समिति को जाता है। यहां मंजूरी मिलने पर जलदाय विभाग को भेजा जाता है। विभाग स्वीकृति जारी कर प्रक्रिया शुरू करता है। इसमें कम से कम डेढ़ से दो महीने लग जाते हैं। जलदाय विभाग के मुताबिक नई व्यवस्था केवल गर्मियों में राहत दिलाने के लिए है।
सीकर में आएगा 64 करोड़ रुपए का खर्चा
जलदाय विभाग के मुताबिक एक हैंडपंप पर औसत खर्चा 80 हजार रुपए आता है। ऐसे में सीकर की आठ विधानसभा क्षेत्रों में सभी 800 हैंडपंप मंजूर होकर लगते हैं तो 64 करोड़ का खर्चा आएगा।
'विधानसभा में जरूरत के हिसाब से 100 हैंडपंप लगाएंगे। विधायक जरूरत के हिसाब से यह हैंडपंप लगवा सकेंगे।प्रदेश के अधिकारियों को इस बारे में बता दिया गया है। प्रदेश में 20 हजार हैंडपंप लगाने की योजना है। इसके लिए कुछ गाइड लाइन तय की गई है।'
डा. पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रमुख शासन सचिव, जलदाय विभाग