सीकर। अफसरशाही चाहे तो योजनाओं को तुरंत मूर्त रूप देकर जनता को राहत दे सकती है। शहर में 24 घंटे में अतिक्रमण हटाकर एक क्षेत्र को संवारने की योजना ने यह साबित भी कर दिया। दरअसल कलेक्ट्रेट के पास नवलगढ़ पुलिया से उतरते ही जाम की बड़ी समस्या है। वजह है ऑटो चालक यहां रोड पर खड़े होकर सवारियां बैठाते हैं। इससे आगे दुकानदारों ने चबूतरे बनाकर अतिक्रमण कर रखा था। यह समस्या 15 साल से थी।
दो दिन पहले अफसरों का ध्यान इस तरफ गया। उन्होंने परेशानी कलेक्टर तक पहुंचाई। कलेक्टर ने नगर परिषद अधिकारियों को बुलाकर तुरंत ही प्लानिंग बनवाई। आदेश दिया कि अगले तीन दिन में इस पर काम हो जाना चाहिए। सख्ती का असर यह रहा कि सुबह होते ही योजना पर काम शुरू हो गया। चूंकि नगर परिषद ने विकास कार्यों के लिए शहर को कई जाेन में बांट रखा है। लिहाजा टेंडर की जरूरत भी नहीं पड़ी। दिक्कत सिर्फ यह थी कि दुकानों के सामने अतिक्रमण हटाने के दौरान विरोध हो सकता था। इसलिए रात का वक्त चुना गया। शनिवार रात ढाई बजे तक अतिक्रमण हटाया और अर्थ वर्क किया। रविवार को दिन में लेवलिंग की। शाम होते-होते ग्रेवल मैटेरियल डालना शुरू कर दिया। टेंडर लेने वाली एजेंसी का दावा है कि अगले दो दिन में इंटरलाकिंग टाइल डालकर खाली जगह तैयार कर दी जाएगी। कलेक्टर की सख्ती का असर रहा कि नगरपरिषद के कमिश्नर, एक्सईन लगातार माॅनिटरिंग कर रहे हैं।
10 साल से इन परेशानियों पर अफसरों की कवायद, नहीं दिला सके राहत
प्रशासन और नगरपरिषद की एक छोटी सी कोशिश से कलेक्ट्रेट के सामने की स्थिति सुधरने जा रही है। सवाल यह है कि जब एक जगह के हालात बदल सकते हैं तो बाकी अटके कामों को भी पूरा किया जा सकता है। भास्कर बता रहा है शहर की इसी तरह की और भी समस्याएं जिनके समाधान के लिए प्रशासन को इसी तरह की तत्परता दिखानी जरूरी है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट: जगह जगह जाम की स्थिति रहती है। डाक बंगला, कल्याण सर्किल, बजरंग कांटा, स्टेशन रोड के हालात किसी से छिपे नहीं है। यहां न तो सही तरीके से ट्रैफिक चलता है और न इसके लिए सुचारू प्रबंध हैं।
समाधान : डाक बंगला पर तीन लेन बनाकर वाहनों को निकालें तो काफी हद तक निजात मिल सकती है। कल्याण सर्किल पर पेट्रोल पंप के सामने का कट बंद कर वाहनों को सर्किल से ही घुमाया जाए तो यहां जाम नहीं लगेगा। नटराज होटल के सामने का डिवाइडर आगे तक होना चाहिए। तबेला मार्केट को नो व्हीकल जोन बनाया जा सकता है।
पार्किंग व्यवस्था : शहर में कहीं भी स्थाई पार्किंग नहीं है। स्टेशन रोड, श्रमदान मार्ग, जिला क्लब के पास, स्टेशन रोड, तबेला बाजार के पास यह बड़ी समस्या है।
स्टेशन रोड पर सफेद पट्टी बनाई थी : मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण लोग रोड पर गाडिय़ां खड़ी करते हैं। श्रमदान मार्ग के वाहनों को इसके सामने जहां टैक्सी लगती हैं वहां खड़ा किया जा सकता है। टैक्सी गाड़ियों को कहीं भी दूसरी जगह स्टैंड दिया जा सकता है। तबेला बाजार के वाहन दीवान मार्केट में पार्क हो सकते हैं।
ऑटो व बस स्टैंड : शहर में स्टैंड नहीं हैं। बसें व ऑटो कहीं भी रुक जाते हैं। जयपुर, फतेहपुर, सालासर, नवलगढ़ रोड, कल्याण सर्किल, डिपो तिराहा पर बड़ी समस्या।
यातायात पुलिस : परिवहन विभाग व नगर परिषद मिलकर शहर में स्टैंड तय करें। इसके लिए पहले भी प्लानिंग हुई थी लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई। जयपुर रोड से आने वाली निजी बसों को मंडी से आगे जाने पर रोक लगाई गई थी। कलेक्टर बदलने के बाद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। एक कमेटी बनाकर इस पर काम किया जा सकता है।
अतिक्रमण : कई बार अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया। मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण फिर से वही हालात बन जाते हैं।
नगर परिषद को व्यापारियों को साथ लेकर अतिक्रमण हटाना चाहिए। प्रशासन इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग करे तो जाम और पार्किंग की समस्या भी अपने आप दूर हो जाएगी।
आवारा पशु : आवारा पशुओं से शहर के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। आए दिन इनकी वजह से हादसे होते हैं।
लंबे समय से नंदीशाला का प्रोजेक्ट लंबित चल रहा है। गोशालाओं से संपर्क भी इस समस्या से निजात दिलाई जा सकती है। चारा डालने के लिए भी निश्चित स्थान तय किए जा सकते हैं।
प्रशासन जीते जनता का भरोसा
शहर अपना है। ऐसे में आम लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इसे स्वच्छ और सुंदर बनाने में सहयोग दें। हालांकि आम लोेग और व्यापारी पार्किंग, अतिक्रमण के अच्छे इंतजामों के पक्ष में हैं। वे चाहते हैं कि प्रशासन सख्ती नहीं उनका भरोसा और दिल जीतकर शहर को संवारने की योजनाओं को आगे बढ़ाए।
एक के बाद एक प्रोजेक्ट पर काम करेंगे : कलेक्टर
ट्रैफिक, पार्किंग व अतिक्रमण प्राथमिकता में है। इसके लिए योजना भी बनाई जा रही है। जो भी अव्यवस्था सामने आएगी उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। लोगों से भी सुझाव लिए जाएंगे।
एलएन
सोनी, कलेक्टर