पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंसीकर। बेटियों को लेकर राजस्थान की सोच बदल रही है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। लिंगानुपात में सुधार हुआ है तो बेटियों की कामयाबी का ग्राफ भी बढ़ रहा है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं की मेरिट से लेकर रिजल्ट में बेटियों का ही दबदबा है।
खास बात यह है कि लिंगानुपात में सुधार वाले जिले की बेटियां कामयाबी में बेटों की तुलना में काफी आगे निकल गई हैं। बदलाव की यह कहानी अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, जयपुर, झुंझुनूं, सीकर, कोटा व चूरू में लिखी जाने लगी है। बड़ा उदाहरण कभी भू्रण हत्या में अव्वल रहे झुंझुनूं में सामने हैं।
तीन साल पहले लिंगानुपात यहां एक हजार के मुकाबले 800 तक आ चुका था जो काफी तेजी से बदला है। साल 2011 में जन्मे बच्चों में एक हजार बेटों पर 845 बेटियां थीं। बदल रही सोच का ही नतीजा है कि साल 2012 में लिंगानुपात सुधरकर 876 पर आ गया है।
बेटियों ने भी मान रखा और 12वीं साइंस व कॉमर्स मेरिट में अव्वल रहकर साबित कर दिया कि बेटों से वे कतई कम नहीं। रिजल्ट में भी दस फीसदी आगे हैं। प्रशासनिक परीक्षाओं में भी बेटियां माता-पिता की कसौटी पर खरा उतर रही हैं।
मौका मिला तो साबित कर दिखाया
सीकर : कॉमर्स में 9.43 व साइंस वर्ग में 7.51 फीसदी बेटियां ज्यादा पास। चूरू : कॉमर्स में 11.63 और साइंस में 6.93 फीसदी ज्यादा परिणाम रहा है। झुंझुनूं : साइंस वर्ग में 10.8 और कॉमर्स में 7.37 प्रतिशत ज्यादा रहा है बेटियों का रिजल्ट। अजमेर : कॉमर्स वर्ग में14.75 ज्यादा रिजल्ट रहा है बेटियों का। साइंस वर्ग बेटों की तुलना में 11.66 फीसदी
रिजल्ट ज्यादा। भीलवाड़ा : कॉमर्स में छह फीसदी ज्यादा पास हुई बेटियां। साइंस वर्ग में नौ फीसदी। नागौर : कॉमर्स में 21.88 और साइंस में 8.65 फीसदी ज्यादा रिजल्ट रहा है बेटियों का।
जयपुर : बेटों की तुलना में साइंस में 9.11 और कॉमर्स में 7.53 फीसदी बेटियां ज्यादा कामयाब हुई है। कोटा : साइंस में 9.71 और कॉमर्स में 11.29 फीसदी ज्यादा रिजल्ट।साइंस मेरिट में योगिता सिंघल ने तीसरा स्थान बनाया।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.