जयपुर/सीकर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बैंच ने सीकर जिले में स्थित 174 स्टोन क्रेशरों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। इनमें 52 क्रेशर लाइसेंस से और बाकी बिना लाइसेंस के चल रहे थे।
विलेजर्स ऑफ विलेज पाटनवाटी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान के मामले में ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को समूचे प्रदेश में स्टोन क्रेशरों का सर्वे कराकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से स्टोन क्रेशरों की वजह से पर्यावरण को हो रहे नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
सोमवार को नीमकाथाना के भराला गांव निवासी कैलाश मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दिलीप सिंह ने यह आदेश दिए। इस मामले में ग्रामीणों की तरफ से पैरवी कर रहीं वकील साधना पाठक ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को सीकर के इन सभी स्टोन क्रेशरों की मशीनरी जब्त करने और इनकी बिजली व पानी की आपूर्ति तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को कहा है कि समूचे प्रदेश में सर्वे कराया जाए और अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशरों को जब्त किया जाए। अवैध स्टोन क्रेशरों से वसूली गई 4 करोड़ रुपये की राशि को अपर्याप्त बताते हुए ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया।
कोई लाइसेंस मान्य नहीं :
ट्रिब्यूनल ने 52 ऐसे स्टोन क्रेशरों को राहत देने से इनकार कर दिया, जिनके पास लाइसेंस थे। क्रेशर मालिकों की तरफ से पेश तहसीलदार की रिपोर्ट को ट्रिब्यूनल ने संज्ञान में लेने से भी इनकार कर दिया।
सप्लाई होगी बाधित :
सीकर स्थित इन स्टोन क्रेशरों से राजस्थान के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन में काम आने वाली रोड़ी-बजरी की सप्लाई होती है। स्टोन क्रेशर बंद होने से यह आपूर्ति बाधित होगी, जिससे रोडी-बजरी के रेट बढ़ने की आशंका है।