सीकर/धोद. बगदाद के बसरा की कंपनी में फंसे शेखावाटी के छह कामगार सोमवार को घर लौट आएंगे। कंपनी ने कामगारों को एक माह का वेतन व पासपोर्ट दे दिए हैं। इससे इनकी वतन वापसी संभव हुई। इन्होंने वापसी में मदद के लिए भारतीय दूतावास से गुहार लगाई थी, लेकिन सहयोग नहीं मिला। इस पर इंग्लैंड के जैश उप्पल साहब की मदद ली।
रविवार को बगदाद एयरपोर्ट से इन लोगों ने भास्कर को यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि भास्कर ने 12 सितंबर को कामगारों की दर्द भरी दास्तां के बारे में अवगत कराया था। वतन लौट रहे कामगारों में फतेहपुर के बीबीपुर छोटा निवासी कैलाशचंद्र पुत्र शिवभगवान स्वामी, लक्ष्मणगढ़ गाड़ोदा के सुनील कुमार पुत्र किशनलाल गुर्जर, लोसल के हनुमानाराम पुत्र लालूराम, रानोली के मुजफ्फर बिसायती पुत्र सिकंदर बिसायती, राजपुरा निवासी शंकरलाल सहित छह लोग शामिल हैं।
सभी लोग अलग रूट से आएंगे। सभी करीब नौ महीने पहले निजी कंपनी के मार्फत बगदाद के बसरा की कंपनी में पेंटर व मैशन कार्य के लिए गए थे।
दो माह से लगा रहे थे गुहार
इराक से घर लौट रहे सुनील व उनके साथियों ने भास्कर को बताया कि शुक्र है हम वतन लौट रहे हैं। भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन सहयोग नहीं मिला। इस पर इंग्लैंड के जैश उप्पल साहब की मदद ली। उनके प्रयासों से ही वतन वापसी संभव हुई। इधर, इनके परिजन भी देश लाने के लिए प्रशासन से करीब दो माह से गुहार लगा रहे थे।
भास्कर को बताई दास्तां : निवाला भी छीन लिया था
दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए
इराक कमाने गए शेखावाटी के कामगारों के पहुंचने पर बसरा की कंपनी के प्रतिनिधि उन्हें एयरपोर्ट लेने भी नहीं आए। भटकते हुए सभी कंपनी में पहुंचे तो अधिकारियों ने पासपोर्ट जब्त कर काम बांट दिया।
इसके बाद से उन्हें न तो वेतन मिला और न ही खाने को रोटी। हड़ताल कर हक मांगा तो एक कंपाउंड में बंद कर दिया। यह दास्तां इराक से लौट रहे शेखावाटी के कामगारों ने भास्कर को बताई।
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