सीकर।
एशियाड खेलों के लिए एमसी मैरीकॉम को शेखावाटी के सागरमल धायल बॉक्सिंग के गुर सिखा रहे हैं। धायल को
एशियाई खेलों के लिए भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम का कोच नियुक्त किया गया है। वे भारतीय महिला टीम के साथ 17वें एशियन गेम्स के लिए इंचियोन दक्षिण कोरिया जाएंगे।
धायल 1995 से भारतीय रेलवे टीम के मुक्केबाजी कोच हैं। धायल ने भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि राजस्थान सरकार खेलों के प्रति गंभीर नहीं है। मजबूरी से खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों में जाकर खेलना पड़ता है। धायल राजस्थान के पहले खिलाड़ी है जिन्हें मुक्केबाजी में महाराणा प्रताप अवार्ड मिला है। धायल को एशियाड में मैरीकॉम सहित अन्य महिला बॉक्सरों से स्वर्ण की उम्मीद है।
कबड्डी खेलते थे, बन गए मुक्केबाज
रींगस कस्बे के पुरोहित का बास निवासी सागरमल धायल 1983 में कांवट स्कूल से खेलते हुए कबड्डी के नेशनल प्लेयर भी बने। जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में प्रसिद्ध मुक्केबाज अनूप कुमार व मूलसिंह शेखावत ने उन्हें एक मुक्केबाज से भिड़ने की चुनौती दी। मुक्केबाज को हराया तो धायल का हौसला बढ़ा और वे बॉक्सिंग की और मुड़ गए। इन्होंने नेशनल व इंटरनेशनल मुकाबलों में दर्जनों पदक जीते हैं। इसके लिए भाई हीरालाल धायल ने खूब मदद की।
सागरमल धायल की देखरेख में ही मैरीकॉम, सरिता व पूजा रानी आदि नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में अभ्यास शिविर में एशियाई खेलों की तैयारियों में जुटी हैं। बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने भी सागर धायल के घर रहकर 4 वर्ष तक ट्रेनिंग ली।
पापा की प्रेरणा से बेटा भी बना मुक्केबाज
सागर मल धायल के बेटे सन्नी भी बॉक्सर हैं। वे नेशनल स्तर पर सिल्वर मैडल भी जीत चुके हैं। अपने पिता से मुक्केबाजी के गुर सीखने वाले सन्नी रेलवे टीम के सदस्य हैं। सन्नी का सपना भी बॉक्सिंग को ऊंचाईयों पर लेकर जाना है।