सीकर.पेंशन महा अभियान में जिले में अभी तक सिर्फ दस फीसदी लोगों को ही पेंशन देने के ऑर्डर जारी हो पाए हैं। 90 फीसदी लोगों की पेंशन सरकारी मशीनरी की धीमी रफ्तार में अटकी हुई है। अभियान में 24 हजार 874 लोगों को पेंशन देने के लिए चुना गया। इनमें अभी तक दो हजार 397 लोगों की पेंशन स्वीकृति के ऑर्डर जारी हो सके हैं। इस लापरवाही पर नोडल अधिकारी जिला परिषद सीईओ ने नाराजगी जाहिर करते हुए 18 अफसरों को चिट्टी जारी की है। धोद, दांतारामगढ़, फतेहपुर व लक्ष्मणगढ़ में पेंशन प्रकरण सबसे अधिक अटके हैं।
20 अप्रैल को सरकार ने पेंशन अभियान शुरू करते हुए पूरी सरकारी मशीनरी को इसमें लगा दिया। नियमों के तहत पेंशन तभी मिल सकती है जब संबंधित का पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) यानी अंतिम ऑर्डर जारी हो सके। पेंशन ऑनलाइन खाता बनाने के बाद ही स्वीकृति होती है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आयुक्त के निर्देशों के तहत पेंशन की सभी प्रक्रियाएं अभियान में ही पूरी करनी थी लेकिन अभी तक सिर्फ दो हजार 397 लोगों के ही पीपीओ जारी हो सके। 22 हजार 477 अटके हुए हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्रों में लगाए गए शिविरों में चार हजार 541 में से 1310 लोगों के ही पीपीओ जारी हो सके हैं।
'अधिकारियों ने डाटा ऑपरेटर की कमी व इंटरनेट धीरे चलना वजह बताई थी। डाटा ऑपरेटर उपलब्ध करा दिए गए हैं। बीएसएनएल को भी लिखा गया है। इसके बाद भी कम पीपीओ जारी होते हैं तो कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।'
हनुमान सहाय मीणा, सीईओ, जिला परिषद
18 अफसरों को चिट्ठी जारी कर जताई नाराजगी
नोडल अधिकारी व जिला परिषद सीईओ हनुमान सहाय मीणा ने नाराजगी जाहिर करते हुए छह एसडीएम, छह एसीएम, चार तहसीलदार व दो सहायक नोडल अधिकारियों को चिट्टी लिखी है। खेदजनक बताते हुए नोडल अधिकारी ने सभी अधिकारियों को पेंशन स्वीकृतियों के बकाया पीपीओ जल्द जारी करने के निर्देश दिए हैं। इधर, अफसरों ने तर्क दिया कि इंटरनेट की धीमी रफ्तार व कई जगह कर्मचारियों की कमी की वजह से पीपीओ जारी नहीं हो पा रहे हैं। कलेक्टर ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अधिकारियों को चेताया है।