सीकर। पं. दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी को लेकर गुरुवार को उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ के साथ हुई बैठक में कुलपति व रजिस्ट्रार के बीच विवाद हो गया। कुलपति ने रजिस्ट्रार की शिकायत तक कर दी। इसके बाद रजिस्ट्रार ने भी कई सवाल उठा दिए। उच्च शिक्षा मंत्री ने बात को संभालते हुए यूनिवर्सिटी के काम को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
मीटिंग में मौजूद थे सराफ, फिर भी जमकर लगे आरोप-प्रत्यारोप
बैठक में कुलपति विमलेश चौधरी ने कहा कि रजिस्ट्रार कमला यूनिवर्सिटी नहीं आती हैं। उन्होंने मंत्री से रजिस्ट्रार को हटाने की मांग करते हुए कहा कि वे 23 महीने में सिर्फ 23 दिन ही ऑिफस आई हैं। इस पर रजिस्ट्रार ने पूछा कि क्या कुलपति हर दिन आती हैं। 15 दिन में एक बार आती हैं। वीसी काम करने नहीं देतीं। उन्होंने अपने पक्ष में तर्क दिया कि वे बीमार हैं। इसके बाद भी यूनिवर्सिटी आकर कामों को आगे बढ़ा रही हैं।
रजिस्ट्रार ने मंत्री से कहा कि वे एडीएम लग सकती थीं लेकिन उनकी तबीयत खराब है। वे जितने दिन यूनिवर्सिटी में रहेंगी, तब तक पूरी ईमानदारी से काम करेंगी। उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों ने मामले के बारे में मंत्री को बताया। बैठक में मंत्री ने रजिस्ट्रार की बीमारी को देखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कहा। इस मामले में भास्कर ने बात की तो कुलपति विमलेश चौधरी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। कहा कि यह उनका अंदरूनी मामला है। परिवार में कई बातें होती हैं। उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि बैठक में कई बातें होती हैं। इस पर कुछ नहीं कहना।
भाजपा-कांग्रेस में फंसती रही है यूनिवर्सिटी
शेखावाटी यूनिवर्सिटी तीन साल से राजनीति में फंसी हुई है। भाजपा-कांग्रेस के बीच घोषणा का श्रेय लेने की होड़ भी होती रही है। भाजपा ने पिछले कार्यकाल में इसकी घोषणा की थी लेकिन कांग्रेस सरकार बनते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आंदोलन के बाद कांग्रेस ने बजट में घोषणा की। बाद में नाम को लेकर राजनीति हुई। कांग्रेस ने शेखावाटी यूनिवर्सिटी नाम रखा तो भाजपा ने सरकार में आते ही नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय विवि कर दिया गया है।
- अब सवाल उठने लगे कि क्या भाजपा ने उपलब्धि गिनाने के लिए फैसला हाथोंहाथ किया।
- प्लानिंग डिपार्टमेंट को सत्र 2015-16 के लिए फिर से चार करोड़ 18 लाख रुपए का प्लान दिया गया है।
- यूनिवर्सिटी को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री 16 दिसंबर को दोबारा बैठक लेंगे। इसमें नोटिफिकेशन और प्रक्रिया को लेकर बातचीत हो सकती है।
(फोटो- यूनिवर्सिटी परिसर में चर्चा करते हुए कुलपति चौधरी व अन्य)