सीकर। जिले के सालों पुराने सरकारी भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। कहीं बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता है तो कहीं दीवारों में दरारें आई हुई हैं। स्कूल भवनों की हालत ज्यादा खराब है। ग्रामीणों व शिक्षकों ने बड़े अधिकािरयों व जनप्रतिनिधियों को कई बार हालात से अवगत कराया, लेकिन किसी ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा स्कूलों में साल दर साल नामांकन घटता जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
रींगस. राउमावि के जर्जर भवन से कभी भी हादसा हो सकता है। विद्यालय भवन को सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने पूर्ण रूप से जर्जर घोषित कर दिया तथा छह कमरों की हालत अधिक जर्जर होने पर उन्हें सीज भी किया है। ऐसे में विद्यार्थियों को खुले में बैठकर अध्ययन करना पड़ रहा है। कुछ माह पूर्व एक कमरे की छत रात को गिर गई थी। इसके बाद तत्कालीन एसडीएम डॉ. नरेंद्र सिंह थोरी ने मौका मुआयना कर कुछ कमरों को सीज करवा दिया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग से 12 कमरों व चार प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए तीन करोड, आठ लाख रुपए का प्रस्ताव बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा था जो शिक्षा निदेशक बीकानेर को भेजा जा चुका है,। भवन निर्माण व बजट स्वीकृति के लिए विधायक बंशीधर खंडेला को ज्ञापन दिया गया था।
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