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एसओजी नाकाम, 20 माह बाद फिर सीकर पुलिस को सौंपी माहिच हत्याकांड की जांच

6 वर्ष पहले
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सीकर। फतेहपुर के वकील बृजलाल माहिच की गोली मारकर हत्या का मामला पहले सीकर पुलिस और फिर एसओजी ने ठंडे बस्ते में पटके रखा। 20 महीने तक फाइल धूल फांकती रही तो अब कोर्ट ने यह मामला फिर सीकर पुलिस के पास जांच के लिए भेज दिया है।

पहले सीकर पुलिस नाकाम रही तो डीजीपी ने एसओजी को जांच दी थी। उस वक्त कयास लगाए जा रहे थे कि हत्यारे जल्द ही पकड़े जाएंगे लेकिन न तो मामले को एसओजी ने गंभीरता से लिया और न ही सीकर पुलिस ने। अब जब पुलिस के पास फाइल वापस आई है तो जांच भी नए सिरे से होगी। न तो पुलिस के पास अब वे अधिकारी हैं जिन्हें घटना का पता था और न ही वे जिन्होंने मौका मुआयना किया था।

नए पुलिस अधिकारियों को इस बात की जानकारी भी नहीं है कि हत्या के समय मौके पर क्या सबूत मिले थे? 20 महीने से मृतक के परिजन न्याय के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने कोर्ट में सीबीआई जांच के लिए आवेदन किया तो कोर्ट ने फाइल फिर से जांच के लिए सीकर पुलिस को लौटा दी।
बड़ा सवाल | रंजिश सामने आई, संदिग्ध भी पहचाने फिर भी खुलासा क्यों नहीं कर पाई पुलिस
एक ही विवाद में उलझी रही पुलिस | सीकर में तीन डीएसपी और पांच थानाधिकारियों सहित 40 की टीम लगाई। वकीलों के आंदोलन के दबाव में पुलिस एक ही दिशा में काम करती रही और वह थी कस्बे में एक भूखंड विवाद। उसी से जुड़े लोगों से पूछताछ करती रही। जैसे ही वकील डीजीपी से मिले मामले की जांच एसओजी के पास चली गई। एसओजी भी इसी दिशा में काम करती रही।
दूसरी रंजिश को नहीं लिया गंभीरता से | पुलिस व एसओजी के सामने कई तरह की रंजिश की बातें सामने आई। जिनको गंभीरता से नहीं लिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
शादी-समारोह में गोली मारकर की थी हत्या
चार जून 2013 की रात को वकील बृजलाल माहिच घर से कुछ ही दूरी पर स्थित शादी समारोह में गए थे। रात करीब 10 बजे जब वे शादी में खाना खा रहे थे तभी पांडाल के पर्दे के पीछे से किसी ने उनको गोली मार दी। गोली कनपटी में लगी जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद कस्बे में बवाल हो गया। अगले दिन एनएच 11 जाम कर दिया और जिलेभर के वकीलों ने काफी दिन हड़ताल रखी। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच एसओजी को सौंपी। एसओजी मुश्किल से चार या पांच बार फतेहपुर आई और जांच में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
पूछताछ के बाद संदिग्धों को छोड़ दिया | पुलिस ने वारदात के अगले ही दिन कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ के बाद वापस छोड़ दिया। जब उनको फिर से पूछताछ के लिए बुलाने की कवायद की तो वे लोग इलाका छोड़ चुके थे।
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